शनिवार, 10 दिसंबर 2011

बदकिस्मती बिकती है, खरीदेंगे?

humlog01
वह उठा और एक छोटी कैंची ले आया। उसने कैंची से प्यूपा का छेद बड़ा कर दिया। तितली आराम से बाहर आ गई। आदमी उत्सुक उसे उड़ते देखने को बैठा रहा, लेकिन वह नहीं उड़ी। उंगली से उड़ाने की कोशिश पर वह बस हल्के से हिल डुलकर रह गई, उड़ नहीं पाई...

सीजेरियन प्रसव यानी बच्चे के लिए सुरक्षित। मां को भी प्रसव-वेदना से मुक्ति। यह भ्रम व्यापकता से फैलाया गया है। जनसाधारण को यही बताने के लिए आज की मीटिंग थी। एक छोटी फिल्म दिखाई गई। एक प्यूपा दिखा जिसमें अंदर से छेद कर तितली निकलने की कोशिश कर रही थी। पास बैठा एक आदमी गौर से तितली की यह चेष्टा देख रहा था। बार बार कोशिश के बावजूद भी तितली बाहर नहीं निकल पा रही थी। आदमी को दया आई। वह उठा और एक छोटी कैंची ले आया। उसने कैंची से प्यूपा का छेद बड़ा कर दिया। तितली आराम से बाहर आ गई। आदमी उत्सुक उसे उड़ते देखने को बैठा रहा, लेकिन वह नहीं उड़ी। उंगली से उड़ाने की कोशिश पर वह बस हल्के से हिलडुल कर रह गई, उड़ नहीं पाई।

तितली नहीं उड़ पाई, क्यों कि आदमी ने जो दया की थी वह प्रकृति-प्रतिकूल क्रिया थी। तितली को प्यूपा से निकल ने के लिए जो मशक्कत करनी पड़ती है वह प्रकृति नियत सप्रयोजन है। इस दौरान तितली को जो जोर लगाना पड़ता है उस से उसका रक्त बह कर उसके पंखों में आ जाता है जिससे बाहर आने के तुरंत बाद वह उड़ने में सक्षम हो जाती है। उसी तरह प्रसव के दौरान गर्भपथ से गुजरने की मषक्कत में शिशु के शरीर में प्रकृति नियत ऎसे परिवर्तन होते हैं जो उसे असुरक्षित परिवश से लड़ने की क्षमता देते हैं।

दबाव के कारण शिशु के शरीर में केटाकोलामिन नामक पदार्थ स्त्रावित होते हैं। इनसे लिवर में संग्रहित ग्लाईकोजन ग्लुकोस में बदल जाता है जो शीघ्र-ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करता है। शिशुु के फेंफड़ों में स्थित गर्भजल अवशोषित हो जाता है जिससे आक्सीजन एक्सचेंज सुगम हो जाता है। सीजेरियन प्रसव में यह सब नहीं होता अत: प्रसवोपरांत अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शिशु उससे पार पाने में सक्षम नहीं होता। इसके अतिरिक्त सीजेरियन के तुरन्त बाद नाल बांध कर काटना भी प्रकृति विरूद्ध होता है। प्लेसेन्टा (आंवल) में स्थित रक्त नवजात के शरीर में नहीं पहुंचता।

सीजेरियन प्रसव। तुरन्त नाल बांध बच्चा बालचिकित्सक के हवाले। अस्पताल की नवजात सघन इकाई में देख रेख। बच्चा देखने में स्वस्थ। बड़ा हुआ। पढ़ने भेजा। सीखने में कमजोर, लनिंüग डिसेबिलिटी (ऑटिज्म) का षिकार। इसका कोई और कारण नहीं मिला। दूसरा बच्चा मंद बुद्धि। उसमें भी इसका और कोई कारण नहीं मिला। मां बाप का दुख सहज ही समझा जा सकता है। सीजेरियन प्रसव की बढ़ती दर के साथ इन विकालांगताओं की दर बढ़ती जा रही है। आधुनिक व्यवासायीकृत चिकित्सा में अकारण होते सीजेरियन प्रसवों की यही त्रासदी है। दुर्भाग्य यह कि त्रासदी, अनजाने में, लोग अच्छा खर्च कर मोल लेते हैं।

1 टिप्पणी:

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम! शानदार प्रस्तुती!
मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
http://seawave-babli.blogspot.com/