गुरुवार, 15 मार्च 2012

माँ की वजह से ही है आपका वजूद

एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख कोशिशों के बावजूद वह लड़की का दिल नहीं जीत पाया।

एक दिन वह लड़की से बोला- यदि तुम मुझसे शादी नहीं करोगी तो मैं अपनी जान दे दूँगा। उसकी हरकतों से परेशान हो चुकी लड़की ने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे लड़के से पीछा छूट जाए। वह बोली- मैं तुम्हारे प्यार की परीक्षा लेना चाहती हूँ। बोलो तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो? लड़का बोला- बताओ, मुझे अपने प्यार को साबित करने के लिए क्या करना होगा?

लड़की बोली- क्या तुम मुझे अपनी माँ का दिल लाकर दे सकते हो? लड़का सोच में पड़ गया, लेकिन उस पर तो लड़की को पाने का जुनून सवार था। वह बिना कुछ कहे वहाँ से चल दिया। लड़की खुश हो गई कि अब शायद वह उसका पीछा नहीं करेगा। उधर लड़का घर पहुँचा तो उसने देखा कि उसकी माँ सो रही है। उसने माँ की हत्या कर उसका दिल निकाल लिया और उसे कपड़े में छुपाकर लड़की के घर की तरफ चल पड़ा।
एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख कोशिशों के बावजूद वह लड़की का दिल नहीं जीत पाया।


रास्ते में अँधेरा होने के कारण ठोकर खाकर वह जमीन पर गिर पड़ा और उसकी माँ का दिल उसके हाथ से छिटककर दूर जा गिरा। गिरने पर वह कराहा। तभी माँ के दिल से आवाज आई- बेटा, तुझे चोट तो नहीं लगी? लेकिन इस बात का भी लड़के पर कोई असर नहीं हुआ और वह माँ का दिल लेकर लड़की के घर पहुँच गया। लड़के को अपनी माँ के दिल के साथ आया देख लड़की हतप्रभ रह गई।

उसे बिलकुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि एक बेटा इतना निर्दयी भी हो सकता है। उसे लड़के पर बहुत गुस्सा आया और वह बोली- जो व्यक्ति एक लड़की की खातिर अपनी माँ के निःस्वार्थ प्यार को भूलकर उसका दिल निकाल सकता है, वह किसी दूसरे से क्या प्रेम करेगा।

दोस्तो, यह कहानी भले ही आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन यह सही है कि दुनिया में एक माँ ही होती है, जो खुद लाख दुःख उठा ले, लेकिन अपने बच्चे की छोटी-सी तकलीफ भी सह नहीं पाती। माँ तो इंसान को खुदा से मिली अनुपम सौगात है। वह जननी है। वही सृष्टिकर्ता है, क्योंकि उसके बिना तो सृष्टि आगे बढ़ ही नहीं सकती।
एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख कोशिशों के बावजूद वह लड़की का दिल नहीं जीत पाया।

एक दिन वह लड़की से बोला- यदि तुम मुझसे शादी नहीं करोगी तो मैं अपनी जान दे दूँगा। उसकी हरकतों से परेशान हो चुकी लड़की ने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे लड़के से पीछा छूट जाए। वह बोली- मैं तुम्हारे प्यार की परीक्षा लेना चाहती हूँ। बोलो तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो? लड़का बोला- बताओ, मुझे अपने प्यार को साबित करने के लिए क्या करना होगा?

लड़की बोली- क्या तुम मुझे अपनी माँ का दिल लाकर दे सकते हो? लड़का सोच में पड़ गया, लेकिन उस पर तो लड़की को पाने का जुनून सवार था। वह बिना कुछ कहे वहाँ से चल दिया। लड़की खुश हो गई कि अब शायद वह उसका पीछा नहीं करेगा। उधर लड़का घर पहुँचा तो उसने देखा कि उसकी माँ सो रही है। उसने माँ की हत्या कर उसका दिल निकाल लिया और उसे कपड़े में छुपाकर लड़की के घर की तरफ चल पड़ा।
एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख कोशिशों के बावजूद वह लड़की का दिल नहीं जीत पाया।


रास्ते में अँधेरा होने के कारण ठोकर खाकर वह जमीन पर गिर पड़ा और उसकी माँ का दिल उसके हाथ से छिटककर दूर जा गिरा। गिरने पर वह कराहा। तभी माँ के दिल से आवाज आई- बेटा, तुझे चोट तो नहीं लगी? लेकिन इस बात का भी लड़के पर कोई असर नहीं हुआ और वह माँ का दिल लेकर लड़की के घर पहुँच गया। लड़के को अपनी माँ के दिल के साथ आया देख लड़की हतप्रभ रह गई।

उसे बिलकुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि एक बेटा इतना निर्दयी भी हो सकता है। उसे लड़के पर बहुत गुस्सा आया और वह बोली- जो व्यक्ति एक लड़की की खातिर अपनी माँ के निःस्वार्थ प्यार को भूलकर उसका दिल निकाल सकता है, वह किसी दूसरे से क्या प्रेम करेगा।

दोस्तो, यह कहानी भले ही आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन यह सही है कि दुनिया में एक माँ ही होती है, जो खुद लाख दुःख उठा ले, लेकिन अपने बच्चे की छोटी-सी तकलीफ भी सह नहीं पाती। माँ तो इंसान को खुदा से मिली अनुपम सौगात है। वह जननी है। वही सृष्टिकर्ता है, क्योंकि उसके बिना तो सृष्टि आगे बढ़ ही नहीं सकती।

12 टिप्‍पणियां:

Maheshwari kaneri ने कहा…

सही कहा माँ से बढ़ कर दुनिया में कौन होसकता है..्सटीक व्यंग..

amrendra "amar" ने कहा…

Marmik Kahani , Ye Sach Hai Maa hamesha her paishthi me Maa hi hoti hai wo apne bacche ko kabhi pareshan nahi dkeh sakti, jabki dusre riste Maa ke Riste ka aage Gaud ho jate hai . aaj ke samay me Na jane kyu hum apne hi wajud ko pehchanne me galti ker rahe hai shyd hamare ander natitkta ka abhav hota j arha hai .jo aaj nahi to kal hamare liye bahut hi dukhdayo hoga............aabhar

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…





बेटा, तुझे चोट तो नहीं लगी?
... ... ...

मां तो है मां , मां तो है मां
मां जैसा दुनिया में कोई कहां ...


सच कहा आपने ...

वाह वाह !
बहुत संवेदनशील ! लिखा है ... मार्मिक !
बधाई !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

‎.

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!
-राजेन्द्र स्वर्णकार
♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

*चैत्र नवरात्रि और नव संवत २०६९ की हार्दिक बधाई !*
*शुभकामनाएं !*
*मंगलकामनाएं !*

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रेरक प्रस्तुति ..... आपका यह लेख दो बार कॉपी हो गया है ...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत संवेदनशील और मार्मिक लिखा है भाई
नव संवत्सर की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

रविकर ने कहा…

सही कहा |

BHAWNA PANDEY ने कहा…

bachpan me meri maa ne ye katha sunai thi hum bhai bahano ko ..tab bhi roye the aaj bhi roye :(

मनोज कुमार ने कहा…

विचारोत्तेजक।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये माँ का दिल है .. उस जैसा तो कोई हो नहीं सकता ...

dinesh aggarwal ने कहा…

दिनेश जी मेरा तो मानना है कि यदि ईश्वर है तो वह माँ ही है।
बहुत ही मार्मिक एवं संवेदनशील।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

कहानी पढकर हतप्रभ हूँ. यूँ हमलोग इसके दोनों पक्ष को देखते हैं. प्रेमिका के लिए माँ का अपमान या माँ के लिए प्रेमिका के साथ क्रूरता दोनों ही लज्जापूर्ण है, लेकिन पुरुष ऐसा करते हैं. पुरुष की ही सोच है दोनों. हर रिश्ता महत्वपूर्ण होता है, अगर ऐसी धारणा और सोच हो तो फिर तो ऐसी कहानी जन्म ही न लेगी. लेकिन सच में दुखद है ऐसी स्थिति. आत्मविश्लेषण की ज़रूरत है.
एक ही पोस्ट दोबारा पोस्ट हो गया है, एडिट करके सुधार कर लें. शुभकामनाएँ.