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गुरुवार, 3 मई 2012

प्राइवेट पार्ट के गोरेपन पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस

हद  हो गई  अब क्या  बाकि रह गया है  हिंदुस्तान का सेंशर बोर्ड कर क्या रहा है कभी डर्टी जेसी फिल्मे  आती है और अब तो टीवी पर भी विज्ञापन एसे दिखाई पड़ते है की  देखने वालो लो भी सरम मह्सुश  होने लगती है
मौजूदा समय में एक फेयरनेस क्रिम को लेकर इंटरनेट की दुनिया में जोरदार बवाल मचा हुआ है। यह बवाल हाल ही में टीवी पर प्रसारित हाईजीन फेयरनेस क्रिम के विज्ञापन को लेकर मचा है। इस क्रीम ने यह दावा किया है कि इसके इस्‍तेमाल से महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट का रंग निखार सकती हैं। इस विज्ञापन के प्रसारण के बाद इंटरनेट की दुनिया में एक नई बहस छिड़ गई है और लोग इस विज्ञापन की जमकर निंदा कर रहे हैं।

आगे की बात करने से पहले आपको विज्ञापन के बारे में बताते हैं। विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक पत्‍नी इस बात से बेहद परेशान है कि उसका पति उससे ज्‍यादा अखबारों में खोया रहता है। विज्ञापन में दिखाया गया है कि जैसे ही वह इस हाईजीन क्रीम का इस्‍तेमाल करती ह‍ै उसका पति उसकी ओर खिंचा चला आता है।

अब जरा इंटरनेट की दुनिया में मचे घमासान के बारे में चर्चा करते हैं। इस विज्ञापन को लेकर लोगों में खासा रोष है। सोशल नेटवर्किंग साइट यू ट्यूब पर तो इस विज्ञापन को सात लाख से भी ज्‍यादा लोग देख चुके हैं और इनमें ज्‍यादातर इसके खिलाफ हैं। यू ट्यूब पर एक यूजर्स ने इस विज्ञापन के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि 'महिलाओं को उपेक्षित महसूस कराने वाला एक और उत्‍पाद'। वहीं एक दूसरे यूजर्स ने लिखा है कि 'क्‍या वाकई में इस विज्ञापन में प्राइवेट पार्ट को लेकर महिलाओं की समस्‍याओं को दिखाया गया है? क्‍या वाकई में त्‍वचा का रंग एक समस्‍या है? यह पूरी तरह बकवास है।'

मालूम हो कि बॉलीवुड की कई हस्‍तियां और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी भी फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करते हुए नजर आ चुकी हैं। जिनका दावा है कि उनकी क्रीम के इस्‍तेमाल से कोई भी गोरा बन सकता है और वह सबकुछ हासिल कर सकता है जिसकी उसे चाहत है। इन विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि किस तरह सांवाले रंग वाली लड़की तब तक आगे नहीं बढ़ पाती जब त‍क कि वो इस जादूई फेयरनेस क्रीम का इस्‍तेमाल न कर ले। अब सवाल यह है कि क्‍या इस तरह के विज्ञापन महिलाओं का अपमान नहीं है? क्‍या गोरा रंग जिंदगी के हर इम्‍तहान के लिए जरूरी है?

क्या सांवाले रंग वाली लड़की की शादीया  नहीं होती  ?
क्या सांवाले रंग वाली लड़की  रंग को लेके अव्शाद में रहती है ?
आजकल तो इस गोरे रंग ने वापिस रंग भेद निति जेसी प्रथा को याद दिला दिया  

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

माँ , तुमने महिषासुर का संहार किया

माँ , तुमने महिषासुर का संहार किया
नौ रूपों में अपने
नारी की शक्ति को समाहित किया !
अल्प बुध्धि - सी काया दी
वक्त की मांग पर तेज़
जब-जब अत्याचार बढ़ा
तुमने काया कल्प किया !
रक्त में ज्वाला
आँख में अग्नि
मस्तिष्क में त्रिशूल बन धधकी !
कमज़ोर नहीं है नारी
जाने है दुनिया सारी
माँ तेरी कृपा है हर उस घर में
जहाँ जन्म ले नारी !!!
पहले पहल किसने छुई?
किया किसने अविष्कार धागे के साथ
तेरा रिश्ता? तुम पहले पहल
कैसी थी और अब से कितनी अलग?
कोई औरत सी रही होगी अलाव के पास चमड़े और पत्ते
इसके पहले कि हो बंर्फबारी
हो जाए हालत बद से बदतर
मर्द जबकि लड़ते थे
पत्थरों के हथियारों से जंगलों की लड़ाई
एक औरत
लड़ रही थी सुई से
बुरे मौसमों के विरुध्द
उस औरत को भी
नहीं मालूम
कि सी दी थी
उसने कितनी बड़ी
आदिम सभ्यता की
चादर
वह इसलिए
नहीं सोई
कि उसके मर्द
बच्चों के लिए
गुफा में
सिमटी रहे
थोड़ी-सी गर्मी
नींदों में भी
सुनाई न पड़े
दु:खों की गुर्राहट
फिर पीले पत्ते उड़े
जंगल
अग्रि-पर्वतों में तब्दील हुए पत्ते झुलसे
स्वप् राख हुए तब भी औरत
बना रही थी एक नक्षत्राकार तंबू
बिन थके
बिन थके
आखिरकार उसने बुन ही डाला
संसार का ताना-बाना टांक दिए
आकाश में खरबों सलमे-सितारे
उससे इसको जोड़ा इससे उसको
और पूरी पृथ्वी को ही
उसने बना डाला उष्णऊनों का
धड़कता हुआ गोला शुरु से
जो पास रही औरत के वह थी यही एक
नन्हीं सुई ऊंगलियों के
पोरों में असंख्य बार चुभी, छलकी आंखें
पर न औरत रुकी न ही पृथ्वी...

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बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

एक स्त्री के बारे में....?

क्या तुम जानते हो

क्या तुम जानते हो
पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत?

घर प्रेम और जाति से अलग
एक स्त्री को उसकी अपनी
जमीन के बारे में बता सकते हो तुम?

बता सकते हो
सदियों से अपना घर तलाशती
एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता?

क्या तुम जानते हो
अपनी कल्पना में किस तरह एक ही समय में
स्वयं को स्थापित और निर्वासित करती है एक स्त्री?

सपनों में भागती एक स्त्री का पीछा करते
कभी देखा है तुमने उसे
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में अपने-आपसे लड़ते?

तन के भूगोल से परे
एक स्त्री के मन की गाँठ खोलकर
कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर का खेलता इतिहास?
पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज पर बैठ
शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को?

उसके अंदर वंशबीज बोते
क्या तुमने कभी महसूसा है
उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर?

क्या तुम जानते हो
एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण?

बता सकते हो तुम
एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?

अगर नहीं!
तो फिर क्या जानते हो तुम
रसोई और बिस्तर के गणित से परे
एक स्त्री के बारे में....?

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

नारी किसी से न हारी

नारी किसी से न हारी 

Pariwar Special articleईश्वर की रची सर्वाधिक सुंदर कृति है 'स्त्री'। प्रकृति ने उसे कोमल अवश्य बनाया है , पर उसने  परंपराओं से बाहर  निकलकर मील के पत्थर कायम किए हैं। लेकिन अपनी खास पहचान बनाने के बाद भी कदम-कदम पर उसके लिए चुनौतियां हैं। कभी वह इनसे उबरकर पंख लगाकर उड़ती है तो कभी संघर्ष में उलझ जाती है। आइए, उन्हीं से जानते हैं कि मुश्किलों से भरा यह सफर उन्होंने कैसे तय किया।

पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सामंजस्य
एक कामकाजी महिला के नजरिए से मेरा मानना है औरतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती  अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाकर चलना है। अकेली औरत घर को संभालें या ऑफिस को। ऎसे में प्राथमिकताएं तय करना मुश्किल हो जाता है। महंगाई के मौजूदा दौर में घर-गृहस्थी को चलाने के लिए पति-पत्नी दोनों का कमाना जरूरी हो गया है। महिलाएं भाग्यशाली हैं कि कई काम जैसे टीचर, रिसेपशनिस्ट आदि के लिए उन्हें उपयुक्त माना जाता है पर चूंकि पुरूषों की भांति उनकी जिम्मेदारी केवल दफ्तर तक सीमित नहीं है इसीलिए योग्य होते हुए भी वे कॅ रियर के क्षेत्र मे दोहरी जिम्मेदारी के चलते पिछड़ जाती हैं। घर और बाहर के काम में सामंजस्य बैठाना ही बहुत बड़ी चुनौती है।      

अमरप्रीत सब्बरवाल
नेशनल ट्रेनर

खूबसूरती है पैमाना
स्त्री को हमेशा सौंदर्य के मापदंडों पर तोला जाता है। वह कितनी भी अक्लमंद या टैलंटेड क्यों न हो, पुरूष उसके दैहिक सौंदर्य से ही उसे परखते हैं। एक लड़की का खूबसूरत होना उसके विवाह की पक्की गारंटी समझा जाता है। लड़का चाहे कैसा भी हो, पर पत्नी उसे सुंदर ही चाहिए। ऎसे में कितनी लड़कियों के ब्याह नहीं होते या उनमें से ज्यादातर मन मे कंुठाएं पाल लेती हैं या हीनभावना से ग्रसित हो जाती हैं। जबकि बेहद खूबसूरत çस्त्रयों के पति अक्सर असुरक्षित महसूस करते है,ं आत्मकुंठित हो जाते हैं। कार्यस्थलों पर, जहां मापदंड आकर्षक व्यक्तित्व का होता है, वहां अक्सर छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, अनैतिक संबंध भी इसी मनोदशा के परिचायक हंै। 


महंगाई डायन खाए जात है
एक महिला के समक्ष आज सबसे 
बड़ी चुनौती घर का खर्च चलाने की है। बढ़ती महंगाई ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ कर रख दी है। महीने के आखिर तक आते-आते तो एक-एक रूपया सोच समझकर खर्च करना पड़ता है। महीने के आखिरी दिन इसी जद्दोजहद में गुजर जाते हैं कि सीमित आय में घर का खर्च कैसे चलाएं। जरूरतें तो दिन-ब-दिन बढ़ती ही हैं पर कीमतों में इजाफ ा होने से बजट गड़बड़ा रहा है। लिविंग स्टैंडर्ड मेनटेन करना मध्यम वर्ग के लिए मुश्किल हो 
गया है।

शिवांगी जैन
गृहिणी

एक परिघि है
मेरा मानना है कि एक औरत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपना कॅरियर बनाना। कॅरियर के लिहाज से आज भी महिला के पास बहुत सीमित विकल्प हैं। कामकाज के सिलसिले में कई बार घर से बाहर आने-जाने और रहने वाली लड़कियों के चरित्र पर उंगली उठाई जाती है। चूंकि स्त्री हर कहीं रह नहीं सकती, जा नहीं सकती, ठहर नहीं सकती, ये सीमाएं उसे कमजोर बना देती हैं और वो अपनी काबिलियत सिद्ध नहीं कर पाती। जब वह पुरूष प्रधान समाज के मापदंडों पर खरा उतरने का प्रयास करती है तो उसे कई समझौतेे करने पड़ते हैं। बराबरी का हक देना तो दूर, समाज के कर्णधार लोग उसे हर क्षेत्र में दबाना चाहते हैं

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

एक स्त्री के बारे में....? part 2

मैं देख रहा हूँ कि जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है

चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित और तमगों से लैस
सीना फुलाए हुए सिपाही महाराज की जय बोल रहे हैं.

वे महाराज जो मर चुके हैं
महारानियाँ जो अपने सती होने का इंतजाम कर रही हैं
और जब महारानियाँ नहीं रहेंगी तो नौकरियाँ क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियाँ कर रही हैं.

मुझे महारानियों से ज़्यादा चिंता नौकरानियों की होती है
जिनके पति ज़िंदा हैं और रो रहे हैं

कितना ख़राब लगता है एक औरत को अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना
जबकि मर्दों को रोती हुई स्त्री को मारना भी बुरा नहीं लगता

औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं
औरतें रोती हैं, मरद और मारते हैं
औरतें ख़ूब ज़ोर से रोती हैं
मरद इतनी जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं

इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी रही हो मेरी माँ रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूँगा.

बुधवार, 27 जुलाई 2011

एक स्त्री के बारे में....?

क्या तुम जानते हो

क्या तुम जानते हो
पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत?

घर प्रेम और जाति से अलग
एक स्त्री को उसकी अपनी
जमीन के बारे में बता सकते हो तुम?

बता सकते हो
सदियों से अपना घर तलाशती
एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता?

क्या तुम जानते हो
अपनी कल्पना में किस तरह एक ही समय में
स्वयं को स्थापित और निर्वासित करती है एक स्त्री?

सपनों में भागती एक स्त्री का पीछा करते
कभी देखा है तुमने उसे
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में अपने-आपसे लड़ते?

तन के भूगोल से परे
एक स्त्री के मन की गाँठ खोलकर
कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर का खेलता इतिहास?
पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज पर बैठ
शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को?

उसके अंदर वंशबीज बोते
क्या तुमने कभी महसूसा है
उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर?

क्या तुम जानते हो
एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण?

बता सकते हो तुम
एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?

अगर नहीं!
तो फिर क्या जानते हो तुम
रसोई और बिस्तर के गणित से परे
एक स्त्री के बारे में....?

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

शादी की लड़ाई: बाहर टूटा विवाह के अपराधी को तोड़ने फेर्रेट


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन उर्ध्व प्रवृत्ति में तलाक के 7 साल के लिए विशेष रूप से 2010 की पहली दो तिमाहियों में, जोड़ों की 840,000 से अधिक जोड़े का तलाक राष्ट्रीय पंजीकरण संख्या में, लगभग 5,000 जोड़ों हर दिन तलाक.

तलाक और तलाक के जटिल सामाजिक समस्याओं, कोई संदेह नहीं है, एक कठिन शादी की रक्षा की लड़ाई की एक श्रृंखला के द्वारा लाया की इतनी बड़ी संख्या के साथ रही है आसन्न है इस के लिए शादी की रक्षा की लड़ाई है, इसलिए है कि अंततः प्रेमियों बन जीतने के लिए. आश्रितों, व्यापक चिंता का विषय है इस के लिए शादी की रक्षा, हम शादी तोड़ चाहिए लड़ाई जीतने के लिए नीचे अपराधी टूटा, केवल अपराधी को खोजने के लिए के लिए समस्या का उपाय..अपराधी शादी के टूटने में तो क्या यह शादी के विशिष्ट मामले में हारे के आसपास के कुछ विश्लेषण है?, वास्तव में, के कारणों का पता लगाना है कि वहाँ कई पहलू हैं मुश्किल नहीं:

1.कम गहराई को समझने, फ़्लैश शादी कड़वा भरवां
अब सब कुछ करने के लिए, चला जाता है एक कहावत है कि नहीं दक्षता के बारे में बात लगता है "समय धन है, दक्षता जीवन है" ठीक है इतने सारे लोगों को वास्तव में शादी बम बरसाना पर खेल रहे हैं, पुरुषों और महिलाओं नहीं दिख रहा है कुछ दिन रहने के लिए लाल जोश हो! चक्कर मस्तिष्क, तो लगन, प्यार, में गहराई से समझ और आदान प्रदान भी बदतर, करने के लिए मिठाई विकल्प के बजाय कि उस प्यार और खुशी के लिए भुगतान कर सकते हैं, पैसा नहीं शादी के बाद लंबे समय से परिणाम, या हनीमून खत्म नहीं करता है भी सोचने के लिए,मुसीबत के लिए अपनी पूरी हाथ, रिश्ते टूटने, शादी के एक को समाप्त करने आने के लिए.

2.सहिष्णुता पर्याप्त नहीं, जिम्मेदारी की भावना मजबूत नहीं है
Zhongsuozhouzhi, दो लोग एक साथ आते हैं पति और पत्नी के रूप में संबंधित नहीं है, ठोस, अमर प्रेम Hunyin, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों ने पहले एक दूसरे को मिलनसार सीखना चाहिए, जो भी सहिष्णुता एक दूसरे की कमजोरियों सहित, एक ही समय दूसरे पक्ष पर है, परिवार, जिम्मेदारी के बच्चे की भावना है, ताकि जोड़ों धीरे चला सकते हैं अप वास्तव में मैच के लिए.और अब कई युवा लोगों को बुनियादी तौर पर केवल एक ही बच्चे हैं, यह ठीक इस क्षेत्र में गुणवत्ता का अभाव है, ठेठ सुविधा दंभ है, दूसरों को सिर्फ मुझे जाने, और मैं दूसरों को, मनोवैज्ञानिक के इस तरह के, न केवल जीवन के आराम नहीं करना चाहते के पहलुओं सन्निहित युगल विवाहित जीवन में प्रचुर मात्रा में हर जगह देखा जा सकता है,दो शब्दों की भावनाएँ हल्के और तीन वाक्यों को नहीं करता है एक आम भाषा, सहनशीलता की कमी, सहिष्णुता के बारे में अधिक बात करते हैं, जो वैवाहिक जीवन टूटने में एक घातक कारक करने के लिए अग्रणी है नहीं नहीं कर रहे हैं.

3.शादी के बाद व्यस्त कैरियर, कम प्रशिक्षण प्यार
कई युवा लोगों को हमेशा सोचा है कि शादी के बाद एक सौदा किया है, काम का दबाव, सामाजिक सर्कल चौड़ा, व्यस्त सारा दिन मनोरंजन सेवाओं के साथ युग्मित, भले ही घर में एक निस्तेज, या शराब का राज्य है धुआं आकाश काला, और नव स्थापित शादी के लिए रखरखाव, जानबूझकर या अनजाने में बाहर अन्य संदेह, बाएँ की भावनाओं के रूप में उपेक्षा, शादी उन्मुख संस्कृति की परवाह नहीं की की कमी के बीच गलतफहमी और समय के साथ स्वाभाविक रूप से होती है, शादी अनिवार्य रूप से संकट और दरारें को बढ़ावा मिलेगा.लिटिल वे जानते हैं भावनाओं को विकसित करने और विशेष आवश्यकता समेकित जारी रखने के लिए शादी में, विशेष रूप से, यह पूरी तरह पहला प्यार, पहला प्यार से अलग है, कई वास्तविक, झूठे, प्रत्येक तत्व है, पुरुषों और महिलाओं के बीच शादी को कवर नहीं कर रहे हैं वास्तविक जीवन है, यह एक दूसरे के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं पूरी तरह से संपूर्ण सत्य बिखर, तब भी जब आप एक दूसरे की कमियों को नहीं देख सकता है प्यार में हैं,तो, शादी के पांच साल के भीतर, शादी एक ही बीज बोने की तरह है, ध्यान से संरक्षित किया जाना चाहिए, पूरी तरह खिलने में धीरे - धीरे उज्ज्वल फूल करने के लिए इतनी के रूप में.

4.मज़ा बिना जीवन, नवीनता बदौलत परिवार
एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए, जोड़ों के लिए उनकी पोशाक, शादी की सजावट जब नया घर बहुत खूबसूरत फैशन भी है पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं, लेकिन ठंडा शादी की गर्मी के साथ, कई जोड़ों को न केवल आसान जीवन के लिए जुनून शांत करने के लिए, और परिवार के वातावरण भी बहुत आसान है पर गिर लोकप्रिय, बहुत प्रभावशाली है कि सुश्री गायब हो गया था, और सुंदर लड़कों ठाठ चले गए हैं, या घर की सजावट, जब शादी भी समय कटाव और दृश्य थकान की वजह से बेरंग बिल्कुल रोमांटिक हो जाता है,समय बीतने के, जीवन और नए विचारों के रंग काफी शांत करने के लिए जमा उबाऊ और पुराने ढंग का, कठोर, और बेस्वाद हैं, भावनात्मक संकट में जिसके परिणामस्वरूप.

खुला अपराधी आसानी वैवाहिक संकट को जन्म, विवाह की रक्षा सही पर्चे होने के पहले दोनों एक दूसरे से बहुत, में से एक में गहराई को समझने के माध्यम से पुरुषों और महिलाओं के साथ सभी संपर्क के लिए किसी भी स्टाइलिश फ्लैश शादी मार्ग के लिए किसी भी समय लेने के लिए नहीं की कोशिश करो;. एक ही समय अपने ही साक्षरता का विकास और एक दूसरे को समायोजित करने के लिए शादी की जिम्मेदारी स्थापित करने के लिए कि शादी समझना अधिक समावेशी और जिम्मेदारियों है;शादी के बाद विशेष रूप से, दोनों पार्टियों के लिए भावनाओं का विकास जारी रखने के लिए, भावनाओं का कारण सही नहीं है, दोनों के प्यार और शादी के फूल पानी पत्नियों, लेकिन यह भी, हमेशा की तरह, पूर्व वैवाहिक प्यार के रूप में एक ही समय.

न केवल उपकरण के जीवन और अधिक ध्यान अपने कपड़ों पर होने के लिए, और घर की सजावट के अपरिवर्तनीय नहीं हैं, दृश्य थकान से बचने के लिए है, लेकिन रंगीन होना चाहिए, हर गुजरते दिन के साथ, इस शादी को एक अप्रत्याशित रोमांटिक और अतिरिक्त उपहार ले जाएगा, और यह है कि हाल ही में कई दोस्त बाड़ लाइन में भाग लेने के लिए ब्राउज़ Dulux सजावट डायरी गतिविधियों उनके अद्वितीय फैशन रंगीन घर सुधार से प्रेरणा इन डायरियों प्राप्त देखने के लिए मुश्किल नहीं हैउनके विवाहित जीवन भरा हुआ है, एक रोमांटिक है, है रंग की प्यार से भरा है, और वे मानते हैं कि सुख एक आश्चर्य से बना है, वे इस घटना में भाग लेने के आशा है एक, के लिए एक अप्रत्याशित रोमांटिक सबा जीत है जोड़े या तो के रूप में अन्य पुरस्कार, एक आश्चर्य की एक और खुश शादी जोड़ने के लिए,गृह सुधार उनकी डायरी, साथ ही उनके रोमांटिक शादी देखा वास्तव में सभी लोग ईर्ष्या करेंगे.

संक्षेप में, शादी के लिए समझ है, अधिक सहनशीलता, जिम्मेदारी, प्रशिक्षण और देखभाल की जरूरत की जरूरत है.

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शनिवार, 5 मार्च 2011

स्त्री का अस्तित्व और सवाल


एक सवाल अपने अस्तित्व पर,
मेरे होने से या न होने के दव्न्द पर,
कितनी बार मन होता है,
उस सतह को छु कर आने का,
जहाँ जन्म हुआ, परिभाषित हुई,मै,

अपने ही बनाये दायरों में कैद!
खुद ही हूँ मै सीता और बना ली है,astitva 223x300 स्त्री का अस्तित्व और सवाल
लक्ष्मण रेखा, क्यूंकि जाना नहीं
है मुझे बनवास, क्यूंकि मै
नहीं देना चाहती अग्निपरीक्षा…..
इन अंतर्द्वंद में, विचलित मै,
चीत्कार नहीं कर सकती, मेरी आवाज़
मेरी प्रतिनिधि नहीं है,
मै नहीं बता सकती ह्रदय की पीड़ा ,
क्यूंकि मै स्त्री हूँ,
कई वेदना, कई विरह ,कई सवाल,अनसुलझे?
अनकहे जवाब, सबकी प्रिय, क्या मेरा अपना अस्तित्व,
देखा है मैंने, कई मोड़ कई चौराहे,
कितने दिन कितनी रातें, और एक सवाल,
सपने देखती आँखें, रहना चाहती हूँ,
उसी दुनिया में , क्यूंकि आँख खुली और
काला अँधेरा , और फिर मैं, निःशब्द,
ध्वस्त हो जाता है पूरा चरित्र, मेरा…….
कैसे कह दूँ मैं संपूर्ण हूँ,
मुझमे बहुत कमियां है, कई पैबंद है……….
मै संपूर्ण नहीं होना चाहती,
डरती हूँ , सम्पूर्णता के बाद के शुन्य से
मै चल दूंगी उस सतह की ओर………
ढूंढ़ लाऊँगी अपने अस्तित्व का सबूत…
अपने लिए, मुझे चलना ही होगा,
मैं पार नहीं कर पाउंगी लक्ष्मण रेखा,
मैं नहीं दे पाऊँगी अग्निपरीक्षा,
मैं सीता नहीं,
मैं स्त्री हूँ,
एक स्त्री मात्र!

चौखट पर चीख, चौराहे पर चीरहरण


सदियों से महिलाओं के साथ जैसा दमन और अत्याचार हुआ है वह अकल्पनीय है.सीता और पारवती की आर में पुरषों की साज़िश अब खुलकर सामने आने लगी है.एस देश में स्त्रियों की दशा बद से बदतर होती जा रही है. यह हमारे व्यवहार में आ गया है की हमने स्त्री दमन को सामाजिक स्वरुप दे दिया है. पुरूषों की भोगवादी मानसिकता स्त्रियों को मुक्त देखना पसंद नहीं कर पाती. लेकिन यह भी सही हैकि इसी भोगवादी मानसिकता ने स्त्रियों के लिए रास्ता तैयार किया है और स्त्रियाँ चौखट से निकलकर चौराहें पर आ गयीं है.
breaking free चौखट पर चीख, चौराहे पर चीरहरण पुरुष ने शायद ही कभी इस बात पर ध्यान दिया हो की महिला वैश्याओंकी मंडी क्यूँ अस्तित्व में बनी रही है.लेकिन “मेल स्ट्रिप” का बाज़ार लगता है तो हमारे भौतिक आचरण में सडन आने लगती है.क्यूँ भाई? ऐसा क्यूँ ? क्या स्त्री वैश्या की खोज नहीं कर सकती? देखने सुनने में यह बात भले ही थोड़ी असहज लगे लेकिन यह चेतना के उस धरातल की आजादी है जहाँ सच में बराबरी का बोध होता है.जहाँ स्त्री अपने से अपने बारे में निर्णय लेने के लिया स्वतंत्र है.
यह भी सच है की तथाकथिक आज़ादी का सबसे ज्यादा फ़ायदा बाज़ार उठा रहा है , पुरुष समाज में सदियों से दमित स्त्री देह की लालसा फुटकर बहार निकल रही है. ऐसे में बाज़ार को लगता है की स्त्री देह को जितना बेच सको बेच लो. हमारे आस पास ऐसी घटनाएँ घाट रही है जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते. स्त्री खुले आम अपने देह का पर्दर्शन कर रही है. सुन्दरता का बाजारीकरण हो चूका है.लड़कियां इस पूरी व्यवस्था में यह भूल जाती है की उनका शारीर बाज़ार में रखी कोई वस्तु नहीं है जिसका उद्देश्य किसी और के आनंद और भोगने का माध्यम है.अचानक एक गाना याद आ गया” एक ऊंचा लम्बा कद दूजा सोनी भी तू हद” आगे और भी है. गाने में हीरो कारन बता रहा है की मई क्यूँ तुम पर मरता हूँ. तुम पर मरना की वजह तुम्हारा दिल; दिमाग ,चरित्र नहीं केवल तुम्हारा रूप है. एक ऑब्जेक्ट में तब्दील होती लड़कियां और उपभोक्ता होते पुरुषों की मानसिकता को बनाने में हम सभी का योगदान है.
हम स्त्रियाँ ये नहीं जानती की हम एक व्यवस्था के पंजे में जकड़ी है जो हमे गुलाम करने के नित्य नए तरीके इजाद कर रहा है.जब वे चूल्हे चौखट तक सिमित थी तब भी और अब भी जब वे देहरी के बहार कामयाब होने निकली हैं ,तब भी वे धीमी गति से गुलाम होती जा रही है.जैसा की मधुर भंडारकर की फिल्म फैशन में दिखाया गया है की मॉडल होना एक प्रोफेशन है जिसमे आप केवल एक वस्तु है. एक शारीर जिसे सोचने नहीं दिया जाता जो धीरे धीरे सोचना बंद कर देता है. स्त्री देल aaj  उत्पाद में तब्दील होती जा रही है. इस ब्रेन वश से अज अगर नहीं बचा गया तो स्त्री मुक्ति सदियों दूर हो जाएगी.बार्बी और जीरो फिगर को आदर्श मानने वाली स्त्रियाँ अगर चिन्तनशील है, विचारवान है, अपनी अस्मिता के प्रति सचेत हैं , स्वयं को इन्सान से वस्तु में तब्दील होने देना नहीं चाहती तब शायद चिंता का विषय नहीं है ……………पर क्या वाकई ऐसा है? शायद नहीं.

एक सदी का युद्ध : स्त्री

कई दिनों से सामान बांधे , रेल का टिकेट मेरे पास है…. जाना चाहती थी मै, ऐसी ही यात्रा पर क्यूँ नहीं निकल जाती आज पैर चौखट से निकलते ही नहीं कई बार समझाया, अपनी खुद की व्यथा पर रोई , खुद पर चीत्कार की, जाना ही नियति है, लेकिन पैर ही नहीं उठते मेरे रात का खाना टेबल पर है कपडे सारे धुले हुए अलमारी में…. जाने की सारी तैयारी, पिछली रात को कर ली थी मैंने, फिर क्यूँ खड़ी हूँ मैं , भावशून्य आशंकित, किसका इंतज़ार है, मैंने कितने फैसले सुने, और आज एक फैसला नहीं कर सकती नहीं कर पा रही हूँ, चौखट पार ….. नहीं तोड़ पा रही हूँ मोह की जंजीर, हाथ थामे, कई अनदेखे सपने सूटकेस में बंद, अन्दर आये थे इस चौखट के, बहार तो सिर्फ मुझे जाना है, सारे बीते सालों का मंज़र, मुठी में बंद किये, खड़ी हूँ , आज खुद से नाराज़, हालात से खफा इतनी देर से क्या सोच रही हूँ मै, शायद, पांच बज गए है चाय बना लेती हूँ……………… चौखट पार कर जाती तो….. जीत जाती एक सदी का युद्ध !!!!

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

एक स्त्री के बारे में....? part 1

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी

ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है
और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा हुआ है

मैं कवि हूँ, कर्त्ता हूँ
क्या जल्दी है

मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ
औरतों की अदालत में तलब करूँगा
और बीच की सारी अदालतों को मंसूख कर दूँगा

मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा
जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं
मैं उन डिक्रियों को भी निरस्त कर दूंगा
जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं
मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा
जो दुर्बलों ने भुजबलों के नाम की होंगी.





मैं उन औरतों को
जो अपनी इच्छा से कुएं में कूदकर और चिता में जलकर मरी हैं
फिर से ज़िंदा करूँगा और उनके बयानात
दोबारा कलमबंद करूँगा
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया?
कहीं कुछ बाक़ी तो नहीं रह गया?
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई?

क्योंकि मैं उस औरत के बारे में जानता हूँ
जो अपने सात बित्ते की देह को एक बित्ते के आंगन में
ता-जिंदगी समोए रही और कभी बाहर झाँका तक नहीं
और जब बाहर निकली तो वह कहीं उसकी लाश निकली
जो खुले में पसर गयी है माँ मेदिनी की तरह

औरत की लाश धरती माता की तरह होती है
जो खुले में फैल जाती है थानों से लेकर अदालतों तक

मैं देख रहा हूँ कि जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित और तमगों से लैस
सीना फुलाए हुए सिपाही महाराज की जय बोल रहे हैं..............
11 Feb

एक स्त्री के बारे में....? part 1

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी

ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है
और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा हुआ है

मैं कवि हूँ, कर्त्ता हूँ
क्या जल्दी है

मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ
औरतों की अदालत में तलब करूँगा
और बीच की सारी अदालतों को मंसूख कर दूँगा

मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा
जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं
मैं उन डिक्रियों को भी निरस्त कर दूंगा
जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं
मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा
जो दुर्बलों ने भुजबलों के नाम की होंगी.





मैं उन औरतों को
जो अपनी इच्छा से कुएं में कूदकर और चिता में जलकर मरी हैं
फिर से ज़िंदा करूँगा और उनके बयानात
दोबारा कलमबंद करूँगा
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया?
कहीं कुछ बाक़ी तो नहीं रह गया?
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई?

क्योंकि मैं उस औरत के बारे में जानता हूँ
जो अपने सात बित्ते की देह को एक बित्ते के आंगन में
ता-जिंदगी समोए रही और कभी बाहर झाँका तक नहीं
और जब बाहर निकली तो वह कहीं उसकी लाश निकली
जो खुले में पसर गयी है माँ मेदिनी की तरह

औरत की लाश धरती माता की तरह होती है
जो खुले में फैल जाती है थानों से लेकर अदालतों तक

मैं देख रहा हूँ कि जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित और तमगों से लैस
सीना फुलाए हुए सिपाही महाराज की जय बोल रहे हैं..............
11 Feb

मंगलवार, 15 जून 2010

एक स्त्री के बारे में....?

क्या तुम जानते हो

क्या तुम जानते हो
पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत?

घर प्रेम और जाति से अलग
एक स्त्री को उसकी अपनी
जमीन के बारे में बता सकते हो तुम?

बता सकते हो
सदियों से अपना घर तलाशती
एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता?

क्या तुम जानते हो
अपनी कल्पना में किस तरह एक ही समय में
स्वयं को स्थापित और निर्वासित करती है एक स्त्री?

सपनों में भागती एक स्त्री का पीछा करते
कभी देखा है तुमने उसे
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में अपने-आपसे लड़ते?

तन के भूगोल से परे
एक स्त्री के मन की गाँठ खोलकर
कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर का खेलता इतिहास?
पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज पर बैठ
शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को?

उसके अंदर वंशबीज बोते
क्या तुमने कभी महसूसा है
उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर?

क्या तुम जानते हो
एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण?

बता सकते हो तुम
एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?

अगर नहीं!
तो फिर क्या जानते हो तुम
रसोई और बिस्तर के गणित से परे
एक स्त्री के बारे में....?