रविवार, 2 अक्टूबर 2011
हिन्दी ब्लौगिंग को समृद्ध कीजिये
मंगलवार, 20 सितंबर 2011
“इस्लामी आतंकवाद” की फ़र्ज़ी धारणा
[Former, IG Police, Maharashtra]
Price: Rs 250 / US $15 $20
ISBN-10: 81-7221-038-8
ISBN-13: 978-81-7221-038-0
Year: 2010
Publishers: Pharos Media Publishing Pvt Ltd
यह उन शक्तियों के बारे में पता लगाती है जिनका महाराष्ट्र ए टी एस के प्रमुख हेमंत करकरे ने पर्दाफ़ाश करने की हिम्मत की और आख़िरकार अपने साहस, और सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई।
एक पुस्तक जो साफ़ तौर पर यह कहती है कि ये “ब्राह्मणवादियों” का “ब्राह्मणवादी आतंकवाद” है, इस्लामवादियों का “इस्लामी आतंकवाद” नहीं...
एक स्त्री के बारे में....?
ज़िन्दगी का किस्त धीरे धीरे और भी रिस्तो में बंध कर चुकाना पड़ता है ,
जिसका कुछ ब्याज बिस्तर पर वसूल होता है,,,,,,,,,,
कुछ रसोई में ......आज भी .अधिकांश पुरुषों के लिए नारी को बस यही तक
का उपयोग माना जाता है ..........
सोमवार, 5 सितंबर 2011
“मर्ज़ी का प्यार बनाम मज़बूरी का प्यार
प्रेम सिर्फ देने तथा त्याग का ही दूसरा नाम है , इस बात को मानने वाले आजकल न के बराबर रह गए है ….. आजकल तो प्यार सिर्फ और सिर्फ पाने का ही नाम रह गया है ….. रूह की गहराइयों से कोसो दूर आकर्षण युक्त सिर्फ सतही प्यार ….. ऐसे प्यार का भूत दिलो दिमाग से बहुत ही जल्दी उतर जाया करता है …… ऐसे भी पति – पत्नी के जोड़ें है जिनकी की सारी की सारी उम्र साथ रहते हुए तो बीत जाती है , दर्जनों बच्चे भी हो जाते है , लेकिन अगर उनसे यह पूछा जाए की उन्होंने अपने –२ जीवनसाथी से क्या वास्तव में प्यार किया ? और अगर किया तो कितना ? …… ज्यादातर का जवाब शायद नहीं में होगा …… जब भीतर में उमंग और चाहत ही नही होगी तो प्यार कहाँ से उपजेगा ?….. हम लोग नियति के बनाए हुए रिश्तों में मजबूरी का फर्ज रूपी प्यार करते नही बल्कि उस मज़बूरी के प्यार को भी अपनी जिंदगी मान कर ढोते रहते है …..
इसका मतलब यह नहीं की मैं इस बात के हक में हूँ की सभी को प्रेम विवाह कर लेना चाहिए …… प्रेम विवाह करने वालो का तो और भी बुरा हाल है …… उनकी सफलता का प्रतिशत तो अरेंज्ड मैरिज वालो की तुलना में कहीं भी नहीं ठहरता …… मेरे कहने का मतलब बस इतना भर है की आप विवाह चाहे प्रेम – विवाह करिए या फिर अपने बड़े बजुर्गो की मर्जी से ….. जिससे भी आपका नाता एक बार जुड़ जाए बस फिर उसी को अपना सब कुछ मान कर उसी में डूबकर अपने तन मन और रूह की गहराइयों से प्यार कीजिये … किसी और से सम्बन्ध रखना तो दूर की बात , किसी गैर के बारे में कोई ख्याल लाना भी आपके लिए पाप होना चाहिए ……..
मेरे कालेज के समय में जो साथी लड़के मुझसे किसी लड़की का पीछा करने और उसका घर देख आने में सहायता मांगते थे तो मैं उनसे पहले उनके इष्टदेव के नाम पर यह वचन ले लेता था की अगर उस लड़की से बात बनी तो फिर वोह शादी भी उसी से करेगा …… मैं यह देख कर हैरान रह जाता था की वोह एक सेकंड से पहले शपथ उठा लेते इश्वर के नाम की ……. वोह ज्यादातर समय मेरे साथ ही गुजारते थे , फिर भी पता नही मन के किसी कोने से यह आवाज आती थी की यह अपने वादे पर पूरा नही उतरेंगे ….. मुझको अचरज होता है की जब मुझको उनको साथी होने पर उन पर पूरा विश्वाश नही था तो आजकल की लड़किया लड़को पर किस बिनाह पर विश्वाश कर लेती है ……
शायद इसके दो ही कारण हो सकते है मेरी नजर में …. पहली बात जो जेहन में आती है की यह सच ही कहा गया है की प्यार अंधा होता है ….. जिसमे पड़कर प्रेमी अपना विवेक और सोचने समझने की शक्ति खो देते है ….. दूसरा कारण यह हो सकता है की वोह कहावत जोकि हम लोग अपने बड़े बजुर्गो से सुनते और किताबों में भी पढ़ते आये है की सुन्दर औरते मुर्ख होती है , उनकी अक्ल घुटनों में या फिर उनकी जुल्फों में निवास करती है ….. और यह बात आप सभी भली न्हंती जानते है की आजकल की छोरियों की जुल्फे रही ही कहाँ ….. तो उनकी उसी जन्मजात कमजोरी का फायदा लम्पट पुरुष अक्सर उठाया करते है , और अपना उल्लू सीधा किया करते है …… इस मामले में तो बेचारी कुदरत भी अपनी हार मान लेती है …… उस पराशक्ति ने नारी को इसी कमजोरी पर काबू पाने के लिए और दुनिया का सामना करने के लिए उसको छठी इंद्री रूपी सजगता से नवाजा है जिसको की आजकल हम सिक्स्थ सैंस के नाम से भी जानते है ……
लेकिन आजकल के जमाने में नारियों का यह गुण दब गया है , मुझको तो यही डर है की कम होते -२ कहीं यह एक दिन बिलकुल ही खत्म ना हो जाए …… चाहे हम कितना भी तरक्की क्यों न कर ले , आदमी कितना भी क्यों न गिर जाए , नारी कितनी भी पतित क्यों न हो जाए , लेकिन फिर भी मेरे मन में यह आस और विश्वाश है की वोह दीन कभी नहीं आएगा , जब नारी प्रकर्ति द्वारा अपने इस गुण रूपी हथियार से वंचित हो जायेगी…
रविवार, 4 सितंबर 2011
शिक्षक दिवस पर एक ख़ास रिपोर्ट ; ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online
![]() |
| हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब |
समाचार पत्रों में आप अक्सर समाजसेवियों के बारे में पढ़ते रहते है. किन्तु जो समाजसेवी समाचार पत्रों की सुर्खियाँ बनते है उसके पीछे कितनी सतनी सच्चाई होती है. शायद हर पत्रकार जानता है. ऐसे समाजसेवियों को आईना दिखने के लिए हैं. हाजी अब्दुल रहीम अंसारी, एक ऐसा नाम जो उन लोंगो के लिए के लिए प्रेरणा श्रोत है जो खुद को समाजसेवी कहलाने के लिए परेशान रहते है किन्तु समाजसेवा का कोई कार्य नहीं करते.
मूलतः संत रविदासनगर भदोही जनपद के काजीपुर मुहल्ले के रहने वाले अब्दुल रहीम अंसारी नगर के अयोध्यापुरी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कई वर्षो तक कार्यरत रहे. २००७ में वे इसी विद्यालय से अवकाश प्राप्त किये, दो दिन घर पर रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ की वे घर पर खाली नहीं रह सकते. लिहाजा फिर पहुँच गए उसी स्कूल जहाँ बच्चो को पढ़ाते थे, उन्हें देखते ही बच्चे चहक उठे. उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से पढ़ाने की इच्छा जाहिर की और नियमित रूप से विद्यालय आकर पढ़ाने लगे. यही नहीं विद्यालय का लेखा जोखा पहले उन्ही के पास रहता था, दुबारा यह जिम्मेदारी उन्हें फिर सौंप दी गयी. २००९ में उन्होंने हज भी किया. पांच वक़्त के नमाज़ी अब्दुल रहीम अभी तक नियमित रूप से विद्यालय आकर बच्चो को शिक्षा देते रहते है. उन्हीं के दिशा निर्देश पर पूरा विद्यालय परिवार चलता है. एक बार विद्यालय के प्रधानाद्यापक और सहायक अध्यापक राजीव श्रीवास्तव ने उन्हें अपने वेतन से कुछ पारिश्रमिक देने की बात कही तो वे भड़क उठे. कहा आज भी सरकार उन्हें आधी तनख्वाह देती है. हराम का लेना उन्हें पसंद नहीं जब तक शरीर साथ देगा वे बच्चों को नियमित शिक्षा देंगे. यही नहीं वे होमियोपैथिक के अच्छे जानकर भी है. विद्यालय के बच्चे जब बीमार होते हैं तो वही दवा देते हैं.. यही नहीं जो भी उनके पास इलाज के लिए पहुँचता है. उसे भी दवा देते है. और इस दवा का वे कभी एक पैसा तक नहीं लेते. आज वे अपने मुहल्ले में वे सम्मान की दृष्टि से देखे जाते है. आज जहा लोग पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. ऐसे में वे सम्मान जनक पात्र ही नहीं वरन पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है.
सच इंसानियत, समाजसेवा का जज्बा हर इन्सान में होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो. ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं सलाम करता हूँ. यदि ऐसे लोंगो का अनुसरण लोग करें तो जरा सोचिये समाज का क्या स्वरूप होगा.
हमारी दुआ है कि मुसलमानों को विशेष रूप से हाजी जी के अमल से प्रेरणा मिले और यूं तो वह हरेक के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं ही।
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आज सबसे पहले हाजी अब्दुल रहीम साहब का ही ज़िक्र किया गया है। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं-
गुरुवार, 25 अगस्त 2011
एक स्त्री के बारे में....? part 2
मैं देख रहा हूँ कि जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है
सीना फुलाए हुए सिपाही महाराज की जय बोल रहे हैं.
वे महाराज जो मर चुके हैं
महारानियाँ जो अपने सती होने का इंतजाम कर रही हैं
और जब महारानियाँ नहीं रहेंगी तो नौकरियाँ क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियाँ कर रही हैं.
मुझे महारानियों से ज़्यादा चिंता नौकरानियों की होती है
जिनके पति ज़िंदा हैं और रो रहे हैं
कितना ख़राब लगता है एक औरत को अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना
जबकि मर्दों को रोती हुई स्त्री को मारना भी बुरा नहीं लगता
औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं
औरतें रोती हैं, मरद और मारते हैं
औरतें ख़ूब ज़ोर से रोती हैं
मरद इतनी जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं
इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी रही हो मेरी माँ रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूँगा.
रविवार, 21 अगस्त 2011
ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami
![]() |
| Saleem Khan & Anwer Jamal Khan |
ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami & Happy Ramazan
बुधवार, 27 जुलाई 2011
एक स्त्री के बारे में....?
क्या तुम जानते हो
पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत?
घर प्रेम और जाति से अलग
एक स्त्री को उसकी अपनी
जमीन के बारे में बता सकते हो तुम?
बता सकते हो
सदियों से अपना घर तलाशती
एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता?
क्या तुम जानते हो
अपनी कल्पना में किस तरह एक ही समय में
स्वयं को स्थापित और निर्वासित करती है एक स्त्री?
सपनों में भागती एक स्त्री का पीछा करते
कभी देखा है तुमने उसे
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में अपने-आपसे लड़ते?
तन के भूगोल से परे
एक स्त्री के मन की गाँठ खोलकर
कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर का खेलता इतिहास?
पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज पर बैठ
शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को?
उसके अंदर वंशबीज बोते
क्या तुमने कभी महसूसा है
उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर?
क्या तुम जानते हो
एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण?
बता सकते हो तुम
एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?
अगर नहीं!
तो फिर क्या जानते हो तुम
रसोई और बिस्तर के गणित से परे
एक स्त्री के बारे में....?
शुक्रवार, 20 मई 2011
कभी भी हो सकता है भारत-पाक युद्ध
रविवार, 15 मई 2011
अमेरिका का दोगलापन,कहा 9/11 और 26/11 में कोई तुलना नहीं
सोमवार, 9 मई 2011
एफबीआई की नई सूची के मुताबिक ये हैं दुनिया के बड़े आतंकवादी
एडम
याहिए गदाहन: उम्र 32 साल, ओरेगन में जन्मा और कैलिफोर्निया में पला-बढ़ा। 17
साल की उम्र में इस्लाम धर्म कबूल किया। गदाहन पर देशद्रोह और अल कायदा के नेटवर्क
को साजो सामान मुहैया कराने के आरोप। अल कायदा के लिए कई आतंकी गतिविधियों को अंजाम
देने के आरोप। गिरफ्तारी पर 10 लाख डॉलर का ईनाम।
डेनियल एंड्रियस सैन
डिएगो: उम्र 33 साल, अमेरिकी नागरिक और कम्प्यूटर नेटवर्क संचालित करने में
माहिर। सैन डिएगो पर 2003 में सैन फ्रांसिस्को में दो इमारतों में बम धमाके का
आरोप। एफबीआई के मुताबिक डिएगो ने जानवरों के अधिकार के लिए लड़ रहे अतिवादी
संगठनों से जुड़ाव। गिरफ्तारी पर ढाई लाख डॉलर का ईनाम।
अयमान अल
जवाहिरी: उम्र 59 साल। मिस्र मूल के नागरिक अल जवाहिरी पर तंजानिया और केन्या
में अमेरिकी दूतावासों में 7 अगस्त 1998 को हुए बम धमाकों की साजिश का आरोप है।
पेशे से डॉक्टर अल जवाहिरी इजीप्टियन इस्लामिक जिहाद का संस्थापक है और अब यह अल
कायदा से जुड़ा है। अल जवाहिरी को अल कायदा का ऑपरेशनल कमांडर माना जाता है और अब
बिन लादेन की मौत के बाद इसे ही अल कायदा का सर्वेसर्वा माना जा रहा है। अमेरिकी
सरकार ने इसकी गिरफ्तारी पर ढाई करोड़ डॉलर का ईनाम रखा है।
फहद मोहम्मद
अहमद अल कुसो: उम्र 36 साल, यमन का नागरिक अल कुसो 12 अक्टूबर 2000 को अदन
में अमेरिकी नौसेना के पोत यूएसएस कोल पर विस्फोट मामले का आरोपी है जिसमें 17
अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई थी। इसकी गिरफ्तारी पर 50 लाख डॉलर का ईनाम
है।
जमीन अहमद मोहम्मद अली अल बदावी: उम्र-50 के करीब, अल बदावी पर
भी 12 अक्टूबर 2000 को अमेरिकी पोत पर हुए धमाकों का आरोप है। अल बदावी को यमन के
अधिकारियों ने उस वक्त पकड़ लिया था जब वह अप्रैल 2003 से जेल से भाग रहा था। उसे
मार्च 2004 में फिर से पकड़ा गया लेकिन 3 फरवरी 2006 को फिर से भाग निकला। उसकी
गिरफ्तारी पर 50 लाख डॉलर का ईनाम है।
मोहम्मद अली हमीदी: उम्र 46 साल, हिजबुल्ला का सदस्य। विमान अपहरण और
अमेरिकी नौसैनिक की हत्या के आरोप। ईनाम 50 लाख डॉलर।
अली अतवा: उम्र 50 साल, यह भी हिजबुल्ला से जुड़ा। अली अतवा पर भी हमीदी
जैसे आरोप। ईनाम 50 लाख डॉलर।
हसन इज्ज-अल-दीन: उम्र 47 साल, हसन भी हिजबुल्ला का सदस्य और इस पर भी
हमीदी और अल अतवा के साथ आरोपी। ईनाम 50 लाख डॉलर।
अब्दुल्ला अहमद अब्दुल्ला: उम्र 47 साल, मिस्र मूल के अब्दुल्ला पर
तंजानिया और केन्या में अमेरिकी दूतावासों पर हुए बम धमाके के आरोप। ईनाम 50 लाख
डॉलर।
रविवार, 8 मई 2011
लादेन को दफनाने की जगह का नाम किया 'शहीद' सागर
रेडियो 4 के एक कार्यक्रम में मुराद ने कहा कि स्मारक बनने से बचाने के लिए लादेन को समुद्र में दफनाया गया, लेकिन अब कट्टरपंथियों ने उसे ही शहीद सागर नाम दे दिया है। अमेरिका उन्हें नहीं रोक सकता। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी से जुड़े वकीलों ने गुरुवार को पेशावर उच्च न्यायालय में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के लिए ‘नमाज-ए-जनाजा’ पढ़ा।
‘इस्लामिक लॉयर्स मूवमेंट’ ने उच्च न्यायालय की लॉन में गुलाम नबी की अगुवाई में ‘गायबाना नमाज-ए-जनाजा’ पढ़ा। जमात-ए-इस्लामी से जुड़े करीब 120 वकीलों ने इसमें भाग लिया। इस दौरान वकीलों ने ‘अमेरिका के लिए मौत’ और ‘ओसामा जिंदाबाद’ जैसे नारे भी लगाए। नमाज-ए-जनाजा के बाद लादेन के लिए फातेहा भी पढ़ा गया।
शनिवार, 7 मई 2011
घाटी में लादेन के लिए हुई जुम्मे की नमाज
घाटी में लादेन के लिए हुई जुम्मे की नमाज
श्रीनगर । घाटी के अलगाववादियों ने मारे गए आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन के प्रति अपनी मंशा साफ कर दी है। शांति की वकालत करने वाले हुर्रियत नेता सईद अली शाह गिलानी ने जुम्मे की नमाज के दिन लादेन के विचारों का खुलकर समर्थन किया।
घाटी में लादेन के लिए हुई जुम्मे की नमाज
इस मौके पर हुर्रियत नेता सईद अली शाह गिलानी ने कहा कि अमेरिका ने ओसामा
मंगलवार, 3 मई 2011
जवान बीवी के साथ शानोशौकत से रह रहा था लादेन
दुनिया भर में आतंकवादी गतिविधियां चला रहे ओसामा बिन लादेन के बारे में समझा जाता था कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के दुर्गम पहाडी़ इलाकों में छिप कर अपनी कार्रवाईयों को अंजाम दे रहा है। लेकिन वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के निकट एबटाबाद में पिछले कई सालों से जवान और खूबसूरत बीवी के साथ शाही शानोशौकत के साथ एक बडी़ हवेली में रह रहा था।
ओसामा जिस शानदार हवेली में रह रहा था वह तीन मंजिल की थी और उसकी सुरक्षा के कडे प्रबंध भी किए गए थे। पाकिस्तान के शासन तंत्र की नाक के ठीक नीचे बनी ओसामा की यह हवेली इस्लामाबाद से उत्तर में केवल साठ किलोमीटर की दूरी पर बनी थी। इस इलाके में पाकिस्तान के रसूखदार लोग रहते हैं इनमें से अधिकतर लोग सेना के रिटायर अफसर हैं।
ओसामा की यह हवेली अपने आसपास के मकानों से करीब आठ गुणी ज्यादा बडी़ है और कहीं ज्यादा बडे़ प्लाट पर बनी थी। वर्ष 2005 में जब इस शाही महलनुमा हवेली को बनाया गया था तो उस वक्त इसके आसपास कोई और मकान नहीं था लेकिन पिछले छह सालों में इसके आसपास कई और मकान बन गए। इसके चारों तरफ 12 से 18 फीट ऊंची दीवार खडी़ की गई थी और फिर उसके ऊपर तारों की बाड़ लगा दी गई थी।
इस हवेली में खिड़कियां बेहद कम थीं जिसका मकसद यह था कि वहां रहने वालों का बाहरी दुनिया से संपर्क कम से कम रहे और अडोस-पडोस वालों को यहां रहने वालों को बारे में भनक भी न लगे। इस इमारत में लादेन के अतिविश्वास पात्र लोग ही आ जा सकते थे।
दस लाख डॉलर मूल्य वाली और दो बडे़ दरवाजों की इस इमारत में सुरक्षा के इंतजाम इतने कडे़ थे कि वहां इकठ्ठा होने वाला कूडा़ तक बाहर नहीं जाता था और उसे हवेली के भीतर ही जला दिया जाता था। इसका मकसद यह था कि इमारत से एक सुई तक भी बाहर नहीं जाने दी जाए और किसी भी प्रकार का कोई सुबूत फिजां तक में न पहुंचे। इस इमारत में कोई फोन कनेक्शन या इंटरनेट कनेक्शन तक नहीं पाया गया।
जवाहिरी संभाल सकता है अलकायदा की कमान
आतंकवादी संगठन अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद अब अलकायदा के नंबर दो सरगना अयमान अल जवाहिरी के संगठन की कमान संभालने के कयास लगाए जा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लादेन के मारे जाने की तो घोषणा कर दी है, लेकिन जवाहिरी की स्थिति को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। जवाहिरी और लादेन 2001 में अफगानिस्तान पर हुए अमेरिकी हमले के बाद वहां से ही छिपते फिर रहे थे।
लादेन की तरह जवाहिरी के भी पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमांत पहाडी़ इलाके में छिपे होने के कयास लगाए जाते रहे हैं। ये दोनों आखिरी बार वर्ष 2003 में 'अल जजीरा' टेलीवीजन चैनल द्वारा प्रसारित किए गए अलकायदा की एक वीडियो फुटेज में साथ-साथ दिखे थे।
पेशे से डॉक्टर जवाहिरी का जन्म मिस्र की राजधानी काहिरा के एक उच्च वर्गीय परिवार में 1951 में हुआ था। जवाहिरी ने 1974 में शल्य चिकित्सा में अपनी डिग्री पूरी की और उसके बाद इस्लामिक राजनीतिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड में शामिल हो गया। यह संगठन अरब जगत के बहुत से देशों में सक्रिय है और लोकतांत्रिक तरीकों एवं अहिंसा में विश्वास रखता है।
लेकिन जवाहिरी अधिक दिनों तक नहीं टिका यहां संगठन के अहिंसक तौर तरीके उसे रास नहीं आए और वह मिस्र के 'इस्लामिक जेहाद' संगठन में भी सक्रिय हो गया। इसी संगठन के सदस्यों ने मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सदात की हत्या की थी और उस मामले में गिरफ्तार किए गए 301 लोगों में जवाहिरी का भी नाम था।
पाकिस्तान के पेशावर शहर में 80 के दशक में जवाहिरी की मुलाकात लादेन से उस वक्त हुई जब सोवियत सेना अफगानिस्तान में इस्लामी मुजाहिद्दीन लडा़कों के सफाए में जुटी हुई थी। जवाहिरी इसके बाद लादेन के विचारों से इतना प्रभावित हुआ कि दोनों इसके बाद दुनिया पर इस्लामी राज कायम करने के मकसद से साथ हो गए।
जवाहिरी समय-समय पर अलकायदा की तरफ से वीडियो टेप जारी करता रहता है। इन वीडियो संदेशों में अक्सर उसके निशाने पर अमेरिका रहा है और उसने अमेरिका समेत सभी पश्चिमी मुल्कों में हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों की इन संदेशों में तारीफों के पुल बांधे हैं।
ओबामा के अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने के बाद जवाहिरी ने 2008 में एक टेप जारी करके ओबामा को 'गोरे आकाओं का पिट्ठू'-'हाउस नीग्रो' कहा था इस शब्द का इस्तेमाल अक्सर उन अश्वेत अमेरिकी गुलामों के लिए किया जाता था जो गोरों के प्रति वफादार होते थे। इसके एक वर्ष बाद 2009 में जारी एक अन्य टेप में जवाहिरी ने कहा था कि ओबामा और जार्ज डब्ल्यू बुश में कोई खास अंतर नही है।
सोमवार, 2 मई 2011
मारा गया ओसामा बिन लादेन
10मार्च 1957 को रियाध, सउदी अरब में एक धनी परिवार में जन्मे ओसामा बिन लादेन, अल कायदा नामक आतंकी संगठन के प्रमुख थे. यह संगठन 9 सितंबर 2001 को अमरीका के न्यूयार्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के साथ विश्व के कई देशों में आतंक फैलाने और आतंकी गतिविधियां संचालित करने का दोषी है.रविवार डॉट कॉम के अनुसारसऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया. अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी डॉलरों की ताक़त हासिल थी वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन था. मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी.
अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया.
अमरीकी सैनिकों द्वारा पाकिस्तान में उनके मारे जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को याद करते हुये कहा कि जैसा बुश ने कहा था हमारी जंग इस्लाम के खिलाफ नहीं है. लादेन को पाकिस्तान में इस्लामाबाद के एक कंपाउंड में मारा गया. एक हफ्ते पहले हमारे पास लादेन के बारे में पुख्ता जानकारियां मिल गई थीं. उसने बाद ही कंपाउंड को घेरकर एक छोटे ऑपरेशन में लादेन को मार गिराया गया.
बराक ओबामा ने कहा कि लादेन ने पाक के खिलाफ भी जंग छेड़ी थी. हमारे अधिकारियों ने वहां के अधिकारियों से बात कि और वह भी इसे एक ऐतिहासिक दिन मान रहे हैं. यह 10 साल की शहादत की उपलबधि है. हमने कभी भी सुरक्षा से समझौता नहीं किया. अल कायदा से पीड़ित लोगों से मैं कहूंगा कि न्याय मिल चुका है.
9/11 के हादसे को याद करते हुये बराक ओबामा ने कहा कि इस घटना में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, हम उनके नुकसान को नहीं भूले हैं. आज रात एक बार फिर एकजुट हो जाएं. अमरीका जो ठान ले वह कर सकता है. पैसे और ताकत से नहीं बल्कि एकजुटता ही हमारी शक्ति है.
पाकिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के अभियान में मारे गए अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के पहचान की विधिवत पुष्टि के लिए अमेरिका ने उसका डीएनए परीक्षण कराया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मारे गए व्यक्ति के लादेन ही होने की पुष्टि के लिए डीएनए नमूने लिए गए हैं, लेकिन इसके नतीजे के लिए अभी कुछ दिन इंतजार करना होगा। इसके अलावा लादेन के बारे में किसी भी तरह के शक के खात्मे के लिए चेहरे का मिलान करने वाली अत्याधुनिक फेशियल रिकाग्निशन तकनीक का भी सहारा लिया गया है।
पाकिस्तान सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए चलाए गए विशेष अमेरिकी बलों के अभियान से पल्ला झाड़ता दिखा। प्रशासन ने यह कहते हुए इससे खुद को अलग कर लिया कि एबटाबाद का अभियान अमेरिकी खुफिया विभाग द्वारा संचालित अभियान था।
लेकिन एक सरकारी बयान में कहा गया है कि लादेन की मौत दुनियाभर में आतंकवादी संगठनों के लिए एक बड़ा सदमा है। विदेश विभाग की प्रवक्ता तहमीना जांजुआ ने कहा कि खुफिया बलों द्वारा संचालित अभियान में लादेन सोमवार तड़के एबटाबाद में मारा गया।
उन्होंने कहा कि यह अभियान अमेरिकी बलों द्वारा अमेरिका की घोषित नीति के अनुसार चलाया गया जो कहती है कि दुनिया में जहां कहीं भी वह पाया गया, अमेरिकी बल उसे सीधी कार्रवाई में मार गिराएंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा लादेन के मारे जाने की अपने टेलीविजन संबोधन में घोषणा किए जाने के कुछ घंटे बाद जांजुआ ने कहा कि अलकायदा प्रमुख की मौत आतंकवाद के खात्मे के प्रति पाकिस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह दुनियाभर में आतंकवादी संगठनों को एक करारा झटका है।
जांजुआ ने कहा कि यह पाकिस्तान की घोषित नीति है कि वह किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं करने देगा। पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व, संसद, सरकारी प्रतिष्ठान तथा पूरा राष्ट्र आतंकवाद को समाप्त करने की अपने संकल्प के लिए प्रतिबद्ध है।
जांजुआ ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को अमेरिकी सफल अभियान के बारे में फोन कर जानकारी दी जिसकी परिणति लादेन की मौत के रूप में हुई। प्रवक्ता ने इस बात को स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अमेरिका समेत कई खुफिया एजेंसियों के साथ बेहद प्रभावी खुफिया सूचना साझेदारी प्रबंधन रहा है और वह आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को समर्थन देना जारी रखेगा।
जांजुआ ने कहा कि अल कायदा ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था। अलकायदा समर्थित सैंकड़ों आतंकवादी हमलों के करण हजारों निर्दोष पाकिस्तानी पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए। पिछले कई सालों में आतंकवादी हमलों में करीब 30 हजार पाकिस्तानी नागरिक मारे जा चुके हैं।
अल कायदा तथा अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ अभियान में पांच हजार से अधिक
पाकिस्तानी सुरक्षा तथा सशस्त्र बलों के अधिकारी मारे गए हैं।
अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के अमेरिकी अभियान में मारे जाने के बाद उसकी दो पत्नियोंतथा चार बच्चों को हिरासत में ले लिया गया है।
.2
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि दो महिलाओं तथा चार बच्चों को परिसर से बाहर ले जाया गया है। उन्हें लादेन की पत्नी तथा बच्चे बताया जा रहा है।
3.
अल कायदा सरगना तथा अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में मारा गया। वह पाकिस्तान के एबोटाबाद की एक हवेली में पिछले 5 साल से रह रहा था।
पिछले पांच साल में पाकिस्तान तथा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसके पीछे ओसामा का शातिर दिमाग ही था। उसने अपनी इस हवेली में न तो टेलीफोन कनेक्शन लिया था, और न ही इंटरनेट तथा कोई अन्य इलेक्ट्रोनिक साजो-समान। यहां तक कि इस बड़ी हवेली में बिजली का कनेक्शन भी नहीं था।
वह बाहर की दुनिया से मात्र कूरियर के जरिए संपर्क करता था। इसी के जरिए वह अपने संगठन के अन्य लोगों के साथ संचार का आदान-प्रदान करता था। घर के कचरे को भी फेंका नहीं जाता था, बल्कि घर में ही उसे जला दिया जाता था।
लेकिन ओसामा की इसी चालाकी ने खुफिया एजेंसियों को शक करने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान के बेहद खूबसूरत जगह एबोटाबाद के पॉश इलाके में रहने के बावजूद हवेली में आधुनिक साजो-समान का न होना ही शक का अहम कारण बना। उसके सूचना पहुंचाने वाले व्यक्ति का पीछा करते हुए ही लादेन तक पहुंचा जा सका। उस सूचना पहुंचाने वाले व्यक्ति की जानकारी 9/11 आतंकी हमले के बाद पकड़े गए एक आतंकवादी ने अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को दी थी।
एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि उस हवेली पर हमारी नजर बहुत पहले से थी और हमें यह यकीन था कि उसमें कोई बड़ा आतंकवादी रह रहा है, लेकिन लादेन के होने की सूचना बाद में जाकर पक्की हो पाई।
यह हवेली 2005 में बनाई गई थी। जिस वक्त यह हवेली बनी थी, उस वक्त यह एक कच्ची सड़क के अंत में पड़ती थी। लेकिन बाद में जाकर पिछले 6 सालों मे इसके आस-पास कई घर बन गए। इस इलाके में पाकिस्तान के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के काफी मकान हैं।
खुफिया एजेंसियों के मन में कई सवाल उठेः-
- आखिर ऐसे पॉश इलाके में बिना बिजली के कोई हवेली में कैसे रह सकता है?
- हवेली में टेलीफोन तथा इंटरनेट जैसे इलैक्ट्रोनिक गैजेट्स क्यों नहीं रखा गया है?
- आखिर आधुनिकता से दूर अलग-थलग इस हवेली में कौन रह रहा है?
- कोई घर से बाहर क्यों नहीं निकलता है, यहां तक कि हवेली से कोई कचरा भी नहीं निकाला जाता है?
इन्हीं सब सवालों को ध्यान में रखते हुए, जब खुफिया एजेंसियों ने अपना जाल बिछाया तो उन्हें यह पता लगने में देर नहीं लगी कि इस हवेली में कोई और नहीं बल्कि दुनिया का आतंकवादी नंबर-1 ओसामा बिन लादेन अपने परिवार के साथ रह रहा है।
खुफिया जानकारी की पुष्टि होते ही अधिकारियों ने प्रेसिडेंट ओबामा से कार्रवाई की आज्ञा मांगी और ओबामा ने भी बिना देर लगाए, कार्रवाई को हरी झंडी दे दी। अमेरिकी कमांडो की एक छोटी सी टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गोली मार दी।
इस हमले में ओसामा का बड़ा बेटा भी मारा गया। इसके साथ ही उसकी दो बीवियों तथा 6 बच्चों को गिरफ्तार कर लिया।
मंगलवार, 26 अप्रैल 2011
आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ
आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ
ग़ज़ल में आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ
ग़ज़ल वह सिन्फ़-ए-नाज़ुक़ है जिसे अपनी रफ़ाक़त से
वो महबूबा बना लेता है मैं बेटी बनाता हूँ
हुकूमत का हर एक इनआम है बंदूकसाज़ी पर
मुझे कैसे मिलेगा मैं तो बैसाखी बनाता हूँ
मेरे आँगन की कलियों को तमन्ना शाहज़ादों की
मगर मेरी मुसीबत है कि मैं बीड़ी बनाता हूँ
सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबल रोटी बनाता हूँ
वज़ारत चंद घंटों की महल मीनार से ऊँचा
मैं औरंगज़ेब हूँ अपने लिए खिचड़ी बनाता हूँ
बस इतनी इल्तिजा है तुम इसे गुजरात मत करना
तुम्हें इस मुल्क का मालिक मैं जीते-जी बनाता हूँ
मुझे इस शहर की सब लड़कियाँ आदाब करती हैं
मैं बच्चों की कलाई के लिए राखी बनाता हूँ
तुझे ऐ ज़िन्दगी अब क़ैदख़ाने से गुज़रना है
तुझे मैँ इस लिए दुख-दर्द का आदी बनाता हूँ
मैं अपने गाँव का मुखिया भी हूँ बच्चों का क़ातिल भी
जलाकर दूध कुछ लोगों की ख़ातिर घी बनाता हूँ
बुधवार, 20 अप्रैल 2011
जनवरी लोकपाल विधेयक मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक प्रणाली में सुधार होगा.
रविवार, 10 अप्रैल 2011
राजस्थान के गुमनाम नायकों को सलाम
मंगलवार, 5 अप्रैल 2011
क्या शादियां तोड़ रहा है फेसबुक!?
एक अन्य ऑनलाइन लॉ कंपनी ने कहा कि पिछले साल दाखिल की गई पांच में से एक डिवोर्स याचिका में फेसबुक का जिक्र था। हार्ट स्केल्स एंड हॉजस सॉलिसिटर फैमिली लॉ की हेड एम्मा पटेल ने कहा कि रिश्तों के टूटने में फेसबुक "वर्चुअल थर्ड पार्टी" के रूप में काम कर रहा है।
टेलीग्राफ में छपी रिपोर्ट में एम्मा के हवाले से कहा गया "शादियां टूटने के बढ़ते मामलों के लिए फेसबुक जिम्मेदार है। यह ध्यान देने की बात है कि मई से अभी तक दाखिल की गई अर्जियों में शादी टूटने के कारणों में फेसबुक का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि अपने पार्टनर पर संदेह करने वाले पति-पत्नी इस साइट का इस्तेमाल जासूसी और फ्लर्टिग के सबूत ढूंढने के तौर पर करते हैं। यही सब चीजें ब्रेक-अप के मामलों को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर तलाक के मामले पार्टनर के फेसबुक वाल पर फ्लर्टी मैसेज या फिर आपत्तिजनक चैट देखने के बाद ही आते हैं।
![]() |
सर्वे में तलाक दिलाने वाले करीब 80 फीसदी वकीलों का कहना है कि लोगों ने अपने साथी से अलग होने के लिए सोशल मीडिया पर की गई उनकी बेवफाई को एक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है। यहां तलाक के हर 5 मामलों में से एक मामला 'फेसबुक' से जुड़ा है।
इसमें ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो फेसबुक के माध्यम से बिछुड़ी हुई प्रेमिका से मिल गए हैं। तलाक के सबसे ज्यादा मामले फेसबुक 66 प्रतिशत, माईस्पेस 15 प्रतिशत, ट्विटर 5 प्रतिशत और 14 प्रतिशत अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों से जुड़े हैं।
वेबसाइट 'डाइवोर्स ऑनलाइन' के प्रबंध निदेशक मार्क कीनन का कहना है कि सोशल साइटों पर अनुचित और आपत्तिजनक बातचीत तलाक का मुख्य कारण है।






