सोमवार, 2 मई 2011

मारा गया ओसामा बिन लादेन


10मार्च 1957 को रियाध, सउदी अरब में एक धनी परिवार में जन्मे ओसामा बिन लादेन, अल कायदा नामक आतंकी संगठन के प्रमुख थे. यह संगठन 9 सितंबर 2001 को अमरीका के न्यूयार्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के साथ विश्व के कई देशों में आतंक फैलाने और आतंकी गतिविधियां संचालित करने का दोषी है.


रविवार डॉट कॉम के अनुसारसऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया. अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी डॉलरों की ताक़त हासिल थी वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन था. मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी.


अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया.

अमरीकी सैनिकों द्वारा पाकिस्तान में उनके मारे जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को याद करते हुये कहा कि जैसा बुश ने कहा था हमारी जंग इस्लाम के खिलाफ नहीं है. लादेन को पाकिस्तान में इस्लामाबाद के एक कंपाउंड में मारा गया. एक हफ्ते पहले हमारे पास लादेन के बारे में पुख्ता जानकारियां मिल गई थीं. उसने बाद ही कंपाउंड को घेरकर एक छोटे ऑपरेशन में लादेन को मार गिराया गया.

बराक ओबामा ने कहा कि लादेन ने पाक के खिलाफ भी जंग छेड़ी थी. हमारे अधिकारियों ने वहां के अधिकारियों से बात कि और वह भी इसे एक ऐतिहासिक दिन मान रहे हैं. यह 10 साल की शहादत की उपलबधि है. हमने कभी भी सुरक्षा से समझौता नहीं किया. अल कायदा से पीड़ित लोगों से मैं कहूंगा कि न्याय मिल चुका है.

9/11 के हादसे को याद करते हुये बराक ओबामा ने कहा कि इस घटना में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, हम उनके नुकसान को नहीं भूले हैं. आज रात एक बार फिर एकजुट हो जाएं. अमरीका जो ठान ले वह कर सकता है. पैसे और ताकत से नहीं बल्कि एकजुटता ही हमारी शक्ति है.

DNA टेस्ट से हुई लादेन के शव की पुष्टि

पाकिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के अभियान में मारे गए अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के पहचान की विधिवत पुष्टि के लिए अमेरिका ने उसका डीएनए परीक्षण कराया है।

अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मारे गए व्यक्ति के लादेन ही होने की पुष्टि के लिए डीएनए नमूने लिए गए हैं, लेकिन इसके नतीजे के लिए अभी कुछ दिन इंतजार करना होगा। इसके अलावा लादेन के बारे में किसी भी तरह के शक के खात्मे के लिए चेहरे का मिलान करने वाली अत्याधुनिक फेशियल रिकाग्निशन तकनीक का भी सहारा लिया गया है।

पाकिस्तान ने एबटाबाद के अभियान से पल्ला झाडा़

पाकिस्तान सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए चलाए गए विशेष अमेरिकी बलों के अभियान से पल्ला झाड़ता दिखा। प्रशासन ने यह कहते हुए इससे खुद को अलग कर लिया कि एबटाबाद का अभियान अमेरिकी खुफिया विभाग द्वारा संचालित अभियान था।

लेकिन एक सरकारी बयान में कहा गया है कि लादेन की मौत दुनियाभर में आतंकवादी संगठनों के लिए एक बड़ा सदमा है। विदेश विभाग की प्रवक्ता तहमीना जांजुआ ने कहा कि खुफिया बलों द्वारा संचालित अभियान में लादेन सोमवार तड़के एबटाबाद में मारा गया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान अमेरिकी बलों द्वारा अमेरिका की घोषित नीति के अनुसार चलाया गया जो कहती है कि दुनिया में जहां कहीं भी वह पाया गया, अमेरिकी बल उसे सीधी कार्रवाई में मार गिराएंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा लादेन के मारे जाने की अपने टेलीविजन संबोधन में घोषणा किए जाने के कुछ घंटे बाद जांजुआ ने कहा कि अलकायदा प्रमुख की मौत आतंकवाद के खात्मे के प्रति पाकिस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह दुनियाभर में आतंकवादी संगठनों को एक करारा झटका है।

जांजुआ ने कहा कि यह पाकिस्तान की घोषित नीति है कि वह किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं करने देगा। पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व, संसद, सरकारी प्रतिष्ठान तथा पूरा राष्ट्र आतंकवाद को समाप्त करने की अपने संकल्प के लिए प्रतिबद्ध है।

जांजुआ ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को अमेरिकी सफल अभियान के बारे में फोन कर जानकारी दी जिसकी परिणति लादेन की मौत के रूप में हुई। प्रवक्ता ने इस बात को स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अमेरिका समेत कई खुफिया एजेंसियों के साथ बेहद प्रभावी खुफिया सूचना साझेदारी प्रबंधन रहा है और वह आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को समर्थन देना जारी रखेगा।

जांजुआ ने कहा कि अल कायदा ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था। अलकायदा समर्थित सैंकड़ों आतंकवादी हमलों के करण हजारों निर्दोष पाकिस्तानी पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए। पिछले कई सालों में आतंकवादी हमलों में करीब 30 हजार पाकिस्तानी नागरिक मारे जा चुके हैं।

अल कायदा तथा अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ अभियान में पांच हजार से अधिक

पाकिस्तानी सुरक्षा तथा सशस्त्र बलों के अधिकारी मारे गए हैं।

ओसामा की दो बीवियां तथा चार बच्चे हिरासत में
हालांकि अभी यह नहीं पता चला है कि वे इस समय किसकी हिरासत में हैं। अमेरिकी नौसेना के अभियान की परिणति सोमवार को पाकिस्तान के एबटाबाद में लादेन, उसके एक बेटे, दो संदिग्ध संदेश वाहकों तथा एक महिला के मारे जाने के रूप में हुई, जिन्हें वह शील्ड के रूप में इस्तेमाल करता था।

अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के अमेरिकी अभियान में मारे जाने के बाद उसकी दो पत्नियोंतथा चार बच्चों को हिरासत में ले लिया गया है।

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स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि दो महिलाओं तथा चार बच्चों को परिसर से बाहर ले जाया गया है। उन्हें लादेन की पत्नी तथा बच्चे बताया जा रहा है।

3.

कैसे हुआ ओसामा के छिपे होने का शक

अल कायदा सरगना तथा अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में मारा गया। वह पाकिस्तान के एबोटाबाद की एक हवेली में पिछले 5 साल से रह रहा था।

पिछले पांच साल में पाकिस्तान तथा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसके पीछे ओसामा का शातिर दिमाग ही था। उसने अपनी इस हवेली में न तो टेलीफोन कनेक्शन लिया था, और न ही इंटरनेट तथा कोई अन्य इलेक्ट्रोनिक साजो-समान। यहां तक कि इस बड़ी हवेली में बिजली का कनेक्शन भी नहीं था।

वह बाहर की दुनिया से मात्र कूरियर के जरिए संपर्क करता था। इसी के जरिए वह अपने संगठन के अन्य लोगों के साथ संचार का आदान-प्रदान करता था। घर के कचरे को भी फेंका नहीं जाता था, बल्कि घर में ही उसे जला दिया जाता था।

लेकिन ओसामा की इसी चालाकी ने खुफिया एजेंसियों को शक करने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान के बेहद खूबसूरत जगह एबोटाबाद के पॉश इलाके में रहने के बावजूद हवेली में आधुनिक साजो-समान का न होना ही शक का अहम कारण बना। उसके सूचना पहुंचाने वाले व्यक्ति का पीछा करते हुए ही लादेन तक पहुंचा जा सका। उस सूचना पहुंचाने वाले व्यक्ति की जानकारी 9/11 आतंकी हमले के बाद पकड़े गए एक आतंकवादी ने अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को दी थी।

एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि उस हवेली पर हमारी नजर बहुत पहले से थी और हमें यह यकीन था कि उसमें कोई बड़ा आतंकवादी रह रहा है, लेकिन लादेन के होने की सूचना बाद में जाकर पक्की हो पाई।

यह हवेली 2005 में बनाई गई थी। जिस वक्त यह हवेली बनी थी, उस वक्त यह एक कच्ची सड़क के अंत में पड़ती थी। लेकिन बाद में जाकर पिछले 6 सालों मे इसके आस-पास कई घर बन गए। इस इलाके में पाकिस्तान के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के काफी मकान हैं।

खुफिया एजेंसियों के मन में कई सवाल उठेः-
- आखिर ऐसे पॉश इलाके में बिना बिजली के कोई हवेली में कैसे रह सकता है?
- हवेली में टेलीफोन तथा इंटरनेट जैसे इलैक्ट्रोनिक गैजेट्स क्यों नहीं रखा गया है?
- आखिर आधुनिकता से दूर अलग-थलग इस हवेली में कौन रह रहा है?
- कोई घर से बाहर क्यों नहीं निकलता है, यहां तक कि हवेली से कोई कचरा भी नहीं निकाला जाता है?

इन्हीं सब सवालों को ध्यान में रखते हुए, जब खुफिया एजेंसियों ने अपना जाल बिछाया तो उन्हें यह पता लगने में देर नहीं लगी कि इस हवेली में कोई और नहीं बल्कि दुनिया का आतंकवादी नंबर-1 ओसामा बिन लादेन अपने परिवार के साथ रह रहा है।

खुफिया जानकारी की पुष्टि होते ही अधिकारियों ने प्रेसिडेंट ओबामा से कार्रवाई की आज्ञा मांगी और ओबामा ने भी बिना देर लगाए, कार्रवाई को हरी झंडी दे दी। अमेरिकी कमांडो की एक छोटी सी टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गोली मार दी।

इस हमले में ओसामा का बड़ा बेटा भी मारा गया। इसके साथ ही उसकी दो बीवियों तथा 6 बच्चों को गिरफ्तार कर लिया।





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मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ


आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ

न मैं कंघी बनाता हूँ न मैं चोटी बनाता हूँ
ग़ज़ल में आपबीती को मैं जगबीती बनाता हूँ
ग़ज़ल वह सिन्फ़-ए-नाज़ुक़ है जिसे अपनी रफ़ाक़त से
वो महबूबा बना लेता है मैं बेटी बनाता हूँ
हुकूमत का हर एक इनआम है बंदूकसाज़ी पर
मुझे कैसे मिलेगा मैं तो बैसाखी बनाता हूँ
मेरे आँगन की कलियों को तमन्ना शाहज़ादों की
मगर मेरी मुसीबत है कि मैं बीड़ी बनाता हूँ
सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबल रोटी बनाता हूँ
वज़ारत चंद घंटों की महल मीनार से ऊँचा
मैं औरंगज़ेब हूँ अपने लिए खिचड़ी बनाता हूँ
बस इतनी इल्तिजा है तुम इसे गुजरात मत करना
तुम्हें इस मुल्क का मालिक मैं जीते-जी बनाता हूँ
मुझे इस शहर की सब लड़कियाँ आदाब करती हैं
मैं बच्चों की कलाई के लिए राखी बनाता हूँ
तुझे ऐ ज़िन्दगी अब क़ैदख़ाने से गुज़रना है
तुझे मैँ इस लिए दुख-दर्द का आदी बनाता हूँ
मैं अपने गाँव का मुखिया भी हूँ बच्चों का क़ातिल भी
जलाकर दूध कुछ लोगों की ख़ातिर घी बनाता हूँ
दिनेश पारीक 
दुस्र्भाश नो. ९५८२५९८२४४ 

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

जनवरी लोकपाल विधेयक मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक प्रणाली में सुधार होगा.


जनवरी लोकपाल विधेयक मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक प्रणाली में सुधार होगा.नागरिक समाज द्वारा प्रस्तावित प्रणाली सिस्टम मौजूदाकोई राजनेता या वरिष्ठ अधिकारी कभी बड़ा सबूत फैले भ्रष्टाचार (एसीबी) शाखा और सीबीआई क्योंकि सीधे सरकार के तहत आने के बावजूद जेल में जाता है. जांच शुरू करने या किसी भी मामले में अभियोजन की शुरुआत से पहले, वे एक ही मालिक से अनुमति लेना है, जिनके खिलाफ मामले में जांच की जानी है. और राज्य स्तर पर केंद्र लोकायुक्त पर लोकपाल स्वतंत्र निकायों किया जाएगा. एसीबी और सीबीआई इन निकायों में विलय हो जाएगा. वे किसी की अनुमति की जरूरत के बिना किसी भी अधिकारी या राजनेता के खिलाफ अभियोजन और जांच आरंभ शक्ति होगा. जांच और परीक्षण 1 वर्ष के भीतर पूरा किया जाना चाहिए करने के लिए अगले 1 साल में खत्म हो. दो साल के भीतर, भ्रष्ट जेल में जाना चाहिए.कोई भ्रष्ट अधिकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग, जो भ्रष्ट अधिकारियों को खारिज माना जाता है केवल एक सलाहकार निकाय है. जब भी यह सरकार किसी भी वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्ट खारिज करने के लिए सलाह देते हैं, इसकी सलाह कभी नहीं लागू किया जाता है. लोकपाल और लोकायुक्त को पूरा करने के एक भ्रष्ट अधिकारी की बर्खास्तगी के आदेश शक्तियों होगा. सीवीसी और सभी विभागीय सतर्कता लोकपाल में विलय हो जाएगा और राज्य सतर्कता लोकायुक्त में विलय हो जाएगा.कोई कार्रवाई नहीं की भ्रष्ट न्यायाधीशों के खिलाफ ली गई है, क्योंकि अनुमति भारत के मुख्य न्यायाधीश से आवश्यक है के लिए भी भ्रष्ट न्यायाधीशों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज. लोकपाल और लोकायुक्त जांच करने के लिए और किसी की अनुमति की जरूरत के बिना किसी भी जज पर मुकदमा चलाने के अधिकार होगा.कहीं जाने के लिए - लोग भ्रष्टाचार का पर्दाफाश लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की उनकी शिकायतों पर लिया जाता है. लोकपाल और लोकायुक्त की जांच करने के लिए और हर शिकायत सुनना होगा.वहाँ सीबीआई और सतर्कता विभाग के भीतर इतना भ्रष्टाचार है. उनके कामकाज इतना रहस्य नहीं है कि वह इन एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करती है. लोकपाल और लोकायुक्त में सभी जांच पारदर्शी होगा.जांच पूरी होने के बाद सभी मामले रिकॉर्ड जनता के लिए खुला होगा.लोकपाल और लोकायुक्त के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत और पूछताछ की जाएगी सजा दो महीने के भीतर की घोषणा की.कमजोर और भ्रष्ट लोगों को भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों के प्रमुखों के रूप में नियुक्त कर रहे हैं. नेताओं बिल्कुल कोई अध्यक्ष के चयन और लोकपाल और लोकायुक्त के सदस्यों में कहना होगा. चयन किसी पारदर्शी और सार्वजनिक भागीदारी प्रक्रिया के माध्यम से जगह ले जाएगा.नागरिकों सरकारी कार्यालयों में उत्पीड़न का सामना. कभी कभी वे रिश्वत देने को मजबूर हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी को ही शिकायत कर सकते हैं. कोई कार्रवाई नहीं की शिकायतों पर ले लिया है क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने कटौती हो. लोकपाल और लोकायुक्त सार्वजनिक समयबद्ध तरीके से हल शिकायतों मिलता है, देरी के प्रति दिन 250 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा करने के लिए दोषी अधिकारी और पुरस्कार के वेतन से कटौती की है कि राशि पीड़ित नागरिक को मुआवजे के रूप में.कानून में कुछ भी बीमार हो गया धन वसूली के लिए. एक भ्रष्ट व्यक्ति जेल से बाहर आते हैं और उस पैसे का आनंद सकता है. नुकसान भ्रष्टाचार के कारण सरकार ने सभी आरोपियों से बरामद किया जाएगा कारण होता है.भ्रष्टाचार के लिए सजा भ्रष्टाचार के लिए लघु सजा कम से कम 6 महीने और अधिकतम 7 साल है. बढ़ाया सजा - सजा कम से कम 5 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की होगी

रविवार, 10 अप्रैल 2011

राजस्थान के गुमनाम नायकों को सलाम

news today
राजस्थान के गुमनाम नायकों को सलाम 
यह मायने नहीं रखता कि आप कौन हैं या कहां से हैं? ऑफिसर्स च्वाइस इसे सच साबित करता है। ऑफिसर्स च्वाइस और न्यूज टुडे एकजुट हुआ जिसमें 'ऑफिसर्स च्वाइस न्यूज टुडे सलाम राजस्थान' के माध्यम से आम आदमी की उपलब्धियों और समाज के प्रति उनकी वचनबद्धता को सेलिब्ा्रेट किया गया। ऑफिसर्स च्वाइस द्वारा परिकल्पित और न्यूज टुडे-पत्रिका समूह का एक अग्रणी दैनिक, द्वारा समर्थित, इस पहल के तहत चार मुख्य श्रेणियों- शिक्षा, चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवा, खेल तथा बहादुरी में लोगों को सम्मानित व पुरस्कृत किया गया।

विजेताओं का फैसला निर्णायकों के एक सम्मानित पैनल द्वारा किया गया। सम्मान समारोह का आयोजन जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में किया गया। इस अवसर पर रोमांचक प्रस्तुतियां तथा सांस्कृतिक संगीत का आयोजन किया गया।

एलाइड ब्लेंडर्स और डिस्टिलर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रूपक चतुर्वेदी ने बताया कि 'एक ऎसे आयोजन का हिस्सा होना सौभाग्य की बात है, जो उन शांत व गुमनाम नायकों को प्रतिष्ठा दिलाता है, जो पूरे मनोयोग से हर तरीके से समाज में योगदान देते हैं। यह पहल, ब्ा्रांड की नई पोजिशनिंग 'जगाइए अपने अंदर का ऑफिसर' के अनुरू प है और इस अंत:-दृष्टि से उद्भूत है कि हमारे उपभोक्ता सम्मान व प्रशंसा की कामना करते हैं तथा उस समाज में प्रतिष्ठा भी पाना चाहते हैं जिसमें वो रहते हैं। उनका मानना है कि केवल कर्म के द्वारा ही वो इसे हासिल कर सकते हैं। हमारा कत्तüव्य यह सुनिश्चत करना था कि हमने लक्षित उपभोक्ताओं की इन छिपी प्रेरणाओं व इच्छाओं को पूरा किया। 

हमारा ब्ा्रांड, विश्वसनीयता, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा जैसे मूल्यों का प्रतीक है और यह उसे बताने का सही तरीका है।' चतुर्वेदी ने कहा कि, 'हम, ऎसी पहल के जरिए अपने जिम्मेवार कॉरपोरेट होने की भावना को प्रतिबिंबित करते हैं। यह परिकल्पना आम आदमी की उपलब्धियों को चिह्नित व सम्मानित करने का एक प्रयास है। ऑफिसर्स च्वाइस का मानना है कि यह इन गुमनाम नायकों का सम्मान है, जो हमारे समाज के अन्य लोगों को आम लोगों के व्यापक हित में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

ऑफिसर्स च्वाइस के विषय में
ऑफिसर्स च्वाइस पैकेज्ड डिं्रकिंग वॉटर देश का तेजी से बढ़ता हुआ सम्मानित ब्ा्रांड है। इसने विगत तीन वर्षो में 31 प्रतिशत से अघिक का सीएजीआर दर्ज कराया है। ऑफिसर्स च्वाइस, आज चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश राज्यों में निर्विवाद रू प से बाजार में अग्रणी है।

न्यूज टुडे 
के विषय में
न्यूज टुडे जयपुर, 31 दिसम्बर 2005 को अस्तित्व में आया, जबकि इंदौर संस्करण 14 जून 2006 को लांच किया गया। मैसर्स राजस्थान पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड- राजस्थान के सबसे बड़े मीडिया घराने का उद्यम, न्यूज टुडे ने सांध्य दैनिक की सम्पूर्ण परिकल्पना से क्रांति पैदा कर बाजार पर जबर्दस्त पकड़ बनाई है।

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

क्या शादियां तोड़ रहा है फेसबुक!?

क्या शादियां तोड़ रहा है फेसबुक!?

आजकल हर वो व्यक्ति जो इन्टरनेट को मनोरंजन का साधन समझाता है और उसे अपने जिंदगी का अभिन हिसा मन रखा हैं | है ये बात उन लोगो पे सटीक बताती है की 
क्या शादियां तोड़ रहा है फेसबुक!? इस २१सवि सदी में बहुत कुछ बदल चूका है आज इस युग में इन्टरनेट के बिना हर कम अधुरा समझा जाता है  पर शायद ही किसी ने सोचा होगा की इस का बुरा असर भी  पड़ सकता है |
यदि आपको लगता है कि सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक फ्रैंड्स और फैमिली के साथ संपर्क में रहने के लिए बेहद अच्छा जरिया है तो आप गलत हैं। यह जानकर आश्चर्य होगा कि फेसबुक तलाक के मामलों को महामारी की तरह फैला रहा है।
सोशल नेटवर्किग साइट पर चल रही इश्कबाजी शादियां टूटने का प्रमुख कारण बन रहा है। इससे शादी टूटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। वकीलों ने दावा किया है कि पिछले एक साल में उनके पास तलाक के जितने मामले आए हैं, हर केस में फेसबुक की वेबसाइट शामिल है। यह बड़ी समस्या बनकर उभरा है। एक विशेषज्ञ ने कहा कि उन्होंने बीते नौ महीनों में 30 मामले हैंडल किए हैं और सभी में फेसबुक का पेंच कहीं न कहीं शामिल है।

एक अन्य ऑनलाइन लॉ कंपनी ने कहा कि पिछले साल दाखिल की गई पांच में से एक डिवोर्स याचिका में फेसबुक का जिक्र था। हार्ट स्केल्स एंड हॉजस सॉलिसिटर फैमिली लॉ की हेड एम्मा पटेल ने कहा कि रिश्तों के टूटने में फेसबुक "वर्चुअल थर्ड पार्टी" के रूप में काम कर रहा है।

टेलीग्राफ में छपी रिपोर्ट में एम्मा के हवाले से कहा गया "शादियां टूटने के बढ़ते मामलों के लिए फेसबुक जिम्मेदार है। यह ध्यान देने की बात है कि मई से अभी तक दाखिल की गई अर्जियों में शादी टूटने के कारणों में फेसबुक का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि अपने पार्टनर पर संदेह करने वाले पति-पत्नी इस साइट का इस्तेमाल जासूसी और फ्लर्टिग के सबूत ढूंढने के तौर पर करते हैं। यही सब चीजें ब्रेक-अप के मामलों को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर तलाक के मामले पार्टनर के फेसबुक वाल पर फ्लर्टी मैसेज या फिर आपत्तिजनक चैट देखने के बाद ही आते हैं।


नजरिया २ 
'फेसबुक' को सोशल नेटवर्किंग साइट कहा जाता है। लोगों को एक दूसरे से जोड़ने के कारण इस वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। लेकिन 'अमेरिकन एकेडमी ऑफ मैट्रीमोनियल लॉयर्स' की ओर से हुए एक नए सर्वे में पाया गया है कि इन दिनों फेसबुक लोगों को तलाक लेने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सेलीब्रिटी भी इससे अछूते नहीं है। हाल ही में अभिनेत्री इवा लांगोरिया ने बास्केट बाल खिलाड़ी अपने पति टोनी पार्कर से तलाक ले लिया। इवा ने टोनी पर 'फेसबुक' पर एक महिला के साथ सम्पर्क रखने का आरोप लगाया था।


सर्वे में तलाक दिलाने वाले करीब 80 फीसदी वकीलों का कहना है कि लोगों ने अपने साथी से अलग होने के लिए सोशल मीडिया पर की गई उनकी बेवफाई को एक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है। यहां तलाक के हर 5 मामलों में से एक मामला 'फेसबुक' से जुड़ा है।


इसमें ज्‍यादातर लोग ऐसे हैं जो फेसबुक के माध्‍यम से बिछुड़ी हुई प्रेमिका से मिल गए हैं। तलाक के सबसे ज्यादा मामले फेसबुक 66 प्रतिशत, माईस्पेस 15 प्रतिशत, ट्विटर 5 प्रतिशत और 14 प्रतिशत अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों से जुड़े हैं।


वेबसाइट 'डाइवोर्स ऑनलाइन' के प्रबंध निदेशक मार्क कीनन का कहना है कि सोशल साइटों पर अनुचित और आपत्तिजनक बातचीत तलाक का मुख्‍य कारण है।

रविवार, 3 अप्रैल 2011

मनुहार




Pariwar Special article
उस रात मैं रेलवे प्लेटफॉर्म पर गाड़ी के आने का इंतजार कर रहा था। गाड़ी एक घंटा लेट थी और समय गुजारने के लिए मैं एक बैंच पर बैठा था। मेरी तरह अनगिनत यात्री गाड़ी के आने का इंतजार कर रहे थे। मैंने ध्यान दिया, बहुत से लोग बैंचों पर बैठे थे। कुछ नीचे दरी-चादर बिछाकर लेटे, कुछेक बैठे थे। कुछ लोग अपने परिचितों, मित्रों के साथ खड़े बतिया रहे थे। कुछ इधर से उधर टहल रहे थे। कुछ लोग चाय-बिस्किट के ठेले के पास खड़े थे और अपनी ठंड दूर कर रहे थे।  दो कुली ठंड से सिकुड़े बैठे बीड़ी पी रहे थे।

मैंने घड़ी की ओर ध्यान दिया, साढ़े दस बज रहे थे। गाड़ी के लिए एक घंटे का समय गुजारना था। ठंडी हवाएं शरीर में तीर की तरह चुभने लगी थीं। मैंने बैग से ऊनी टोपा निकालकर पहन लिया। ठंड की चुभन कुछ कम हुई। लगा, ठंडी हवाओं के चल जाने से ठंडक बढ़ी है। लोगों पर इसका असर दिखाई दे रहा है। वैसे भी पूस-माघ की रातें अघिक ठंडी होती हैं। पर मुझे लगा इस साल कुछ अघिक ठंड है। रेलवे पटरी के उस पार नजर गई। देखा, धुएं की तरह घना कोहरा छाया है। उनके बीच जलते हुए विद्युत बल्ब अंगारों की तरह लगे। दूर एक अलाव से उठती आग की लौ दिखाई दी। ऎसा लगा, कुछ लोग अलाव जलाकर बैठे हैं। मैंने भी बैग में से ऊनी शॉल निकालकर कंधों पर डाल लिया। गाड़ी के लेट होने से घर पहुंचने में देर हो जाएगी, इस विचार से बेचैनी बढ़ गई।
सहसा घंटी सुनकर मेरा ध्यान अपने मोबाइल फोन की ओर गया। 

मंगलवार, 22 मार्च 2011

कैमरे में कैद होली

ये सारा  दर्शय  वृन्दावन और मथुरा  का है | जहाँ पर मुझे श्री कृष्ण और राधे की कृपा से दूसरी बार होली खेलने का शोभागय प्राप्त  हुआ है | 
श्री कुञ्ज बिहारी के दर्शन मात्र से पाप नष्ट हो जाते है |  मेने मेरे जीवन का दूसरी बार अद्भुत दर्शय  देखा | जो श्री हरी कृपा  के बिना संभव नहीं था  बस उनकी वृन्दावन , मथुरा बरसना गोकुल गोवर्धन धाम के कुछ दर्शय  दिखाना चाहता हु  
दिनेश पारीक   
 
दिनेश पारीक   



कैमरे में कैद होली
कैमरे में रंग था 
या रंग में था कैमरा

यह पता करना कठिन था
झर रहे थे रंग हाथों सेया बस रहे थे हाथ रंगों में रंग का त्यौहार था या 
हार में गूँथे हुए थे रंग
देखकर भी जान पानाउस समय मुमकिन नहीं था

कोई हीरामन कहीं अंदर बसा था
कोई हरियल सुआ हाथों पर जमा था
कोई पियरी उड़ रही थी कैमरे मेंकोई हल्दी बस रही थी उँगलियों में

रास्तों पर रंग बिखरे थे हवा मेंहर कहीं उत्सव की धारें आसमाँ में
खुशबुओं के थाल नजरों से गुजरते
और परदे पार चूड़ी काँच की
बजती खनक सी
इक हँसी...
जाती थी दिल के पार- गहरी
उस हँसी से लिपट पियरी
नाचती थी
उस हँसी में डूब हीरामन रटा करता था-
होली...

एक पट्टा कैमरे में और वह पट्टा गले मेंकैमरे में गले से लटका हुआ वह शहर सारा
कैमरे में कैद होली
होलियों में शहर घूमा 
रंग डूबा- कैमरा यों ही आवारा
कैमरे में कैद थी होली कि या फिर
होलियों में कैद था वह कैमरा
कहना कठिन था




---दिनेश पारीक 

यह मिट्टी की चतुराई है,
रूप अलग औ’ रंग अलग,
भाव, विचार, तरंग अलग हैं,
ढाल अलग है ढंग अलग,

आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लो।
होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को!

निकट हुए तो बनो निकटतर
और निकटतम भी जाओ,
रूढ़ि-रीति के और नीति के
शासन से मत घबराओ,

आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही कर लो।
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो!

प्रेम चिरंतन मूल जगत का,
वैर-घृणा भूलें क्षण की,
भूल-चूक लेनी-देनी में
सदा सफलता जीवन की,

जो हो गया बिराना उसको फिर अपना कर लो।
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!

होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर लो,
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो,
भूल शूल से भरे वर्ष के वैर-विरोधों को,
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!



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शनिवार, 12 मार्च 2011

सोच रहा हैं अरुणा शानबाग का बिस्तर


सोच रहा हैं अरुणा शानबाग का बिस्तर


अरुणा
मर तो तुम उस दिन ही गयी थी
जिस दिन एक दरिन्दे ने
तुम्हारा बलात्कार किया था
और तुम्हारे गले को बाँधा था
एक जंजीर से
जो लोग अपने कुत्ते के गले मे नहीं
उसके पट्टे मे बांधते हैं

उस जंजीर ने रोक दिया
तुम्हारे जीवन को वही
उसी पल मे
कैद कर दिया तुम्हारी साँसों को
जो आज भी चल रही हैं

उस जंजीर ने बाँध दिया तुमको एक बिस्तर से
और आज भी ३७ साल से वो बिस्तर ,
मै
तुम्हारा हम सफ़र बना
देख रहा हूँ तुम्हारी जीजिविषा
और सोच रहा हूँ

क्यूँ जीवन ख़तम हो जाने के बाद भी तुम जिन्दा हो ??

तुम जिन्दा हो क्युकी तुमको
रचना हैं एक इतिहास
सबसे लम्बे समय तक
जीवित लाश बन कर
रहने वाली बलात्कार पीड़िता का
उस पीडिता का जिसको
अपनी पीड़ा का कोई
एहसास भी नहीं होता

हो सकता हैं
कल तुम्हारा नाम गिनीस बुक मे
भी आजाये

क्यूँ चल रही हैं सांसे आज भी तुम्हारी
शायद इस लिये क्युकी
रचना हैं एक इतिहास तुम्हे

जहां अधिकार मिले
लोगो को अपनी पीड़ा से मुक्ति पाने का
उस पीड़ा से जो वो महसूस भी नहीं करते



आज लोग कहते हैं
बेचारी बदकिस्मत लड़की के लिये कुछ करो
भूल जाते हैं वो कि
लड़की से वृद्धा का सफ़र
तुमने अपने बिस्तर के साथ
तय कर लिया हैं
काट लिया कहना कुछ ज्यादा बेहतर होता

कुछ लोग जीते जी इतिहास रच जाते हैं
कुछ लोग मर कर इतिहास बनाते हैं
और कुछ लोग जीते जी मार दिये जाते हैं
फिर इतिहास खुद उनसे बनता हैं



एक बिस्तर कि भी पीड़ा होती हैं
कब ख़तम होगी मेरी पीड़ा
अरुणा का बिस्तर सोच रहा हैं
और कामना कर रहा हैं
फिर किसी बिस्तर को 
बनना पडे
किसी बलात्कार पीड़िता
का हमसफ़र



लेकिन
बदकिस्मत एक बलात्कार पीड़िता नहीं होती हैं
बदकिस्मत हैं वो समाज जहां बलात्कार होता हैं

बड़ा बदकिस्मत हैं
ये भारत का समाज
जो बार बार संस्कार कि दुहाई देकर
असंस्कारी ही बना रहता हैं

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

शादी की लड़ाई: बाहर टूटा विवाह के अपराधी को तोड़ने फेर्रेट


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन उर्ध्व प्रवृत्ति में तलाक के 7 साल के लिए विशेष रूप से 2010 की पहली दो तिमाहियों में, जोड़ों की 840,000 से अधिक जोड़े का तलाक राष्ट्रीय पंजीकरण संख्या में, लगभग 5,000 जोड़ों हर दिन तलाक.

तलाक और तलाक के जटिल सामाजिक समस्याओं, कोई संदेह नहीं है, एक कठिन शादी की रक्षा की लड़ाई की एक श्रृंखला के द्वारा लाया की इतनी बड़ी संख्या के साथ रही है आसन्न है इस के लिए शादी की रक्षा की लड़ाई है, इसलिए है कि अंततः प्रेमियों बन जीतने के लिए. आश्रितों, व्यापक चिंता का विषय है इस के लिए शादी की रक्षा, हम शादी तोड़ चाहिए लड़ाई जीतने के लिए नीचे अपराधी टूटा, केवल अपराधी को खोजने के लिए के लिए समस्या का उपाय..अपराधी शादी के टूटने में तो क्या यह शादी के विशिष्ट मामले में हारे के आसपास के कुछ विश्लेषण है?, वास्तव में, के कारणों का पता लगाना है कि वहाँ कई पहलू हैं मुश्किल नहीं:

1.कम गहराई को समझने, फ़्लैश शादी कड़वा भरवां
अब सब कुछ करने के लिए, चला जाता है एक कहावत है कि नहीं दक्षता के बारे में बात लगता है "समय धन है, दक्षता जीवन है" ठीक है इतने सारे लोगों को वास्तव में शादी बम बरसाना पर खेल रहे हैं, पुरुषों और महिलाओं नहीं दिख रहा है कुछ दिन रहने के लिए लाल जोश हो! चक्कर मस्तिष्क, तो लगन, प्यार, में गहराई से समझ और आदान प्रदान भी बदतर, करने के लिए मिठाई विकल्प के बजाय कि उस प्यार और खुशी के लिए भुगतान कर सकते हैं, पैसा नहीं शादी के बाद लंबे समय से परिणाम, या हनीमून खत्म नहीं करता है भी सोचने के लिए,मुसीबत के लिए अपनी पूरी हाथ, रिश्ते टूटने, शादी के एक को समाप्त करने आने के लिए.

2.सहिष्णुता पर्याप्त नहीं, जिम्मेदारी की भावना मजबूत नहीं है
Zhongsuozhouzhi, दो लोग एक साथ आते हैं पति और पत्नी के रूप में संबंधित नहीं है, ठोस, अमर प्रेम Hunyin, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों ने पहले एक दूसरे को मिलनसार सीखना चाहिए, जो भी सहिष्णुता एक दूसरे की कमजोरियों सहित, एक ही समय दूसरे पक्ष पर है, परिवार, जिम्मेदारी के बच्चे की भावना है, ताकि जोड़ों धीरे चला सकते हैं अप वास्तव में मैच के लिए.और अब कई युवा लोगों को बुनियादी तौर पर केवल एक ही बच्चे हैं, यह ठीक इस क्षेत्र में गुणवत्ता का अभाव है, ठेठ सुविधा दंभ है, दूसरों को सिर्फ मुझे जाने, और मैं दूसरों को, मनोवैज्ञानिक के इस तरह के, न केवल जीवन के आराम नहीं करना चाहते के पहलुओं सन्निहित युगल विवाहित जीवन में प्रचुर मात्रा में हर जगह देखा जा सकता है,दो शब्दों की भावनाएँ हल्के और तीन वाक्यों को नहीं करता है एक आम भाषा, सहनशीलता की कमी, सहिष्णुता के बारे में अधिक बात करते हैं, जो वैवाहिक जीवन टूटने में एक घातक कारक करने के लिए अग्रणी है नहीं नहीं कर रहे हैं.

3.शादी के बाद व्यस्त कैरियर, कम प्रशिक्षण प्यार
कई युवा लोगों को हमेशा सोचा है कि शादी के बाद एक सौदा किया है, काम का दबाव, सामाजिक सर्कल चौड़ा, व्यस्त सारा दिन मनोरंजन सेवाओं के साथ युग्मित, भले ही घर में एक निस्तेज, या शराब का राज्य है धुआं आकाश काला, और नव स्थापित शादी के लिए रखरखाव, जानबूझकर या अनजाने में बाहर अन्य संदेह, बाएँ की भावनाओं के रूप में उपेक्षा, शादी उन्मुख संस्कृति की परवाह नहीं की की कमी के बीच गलतफहमी और समय के साथ स्वाभाविक रूप से होती है, शादी अनिवार्य रूप से संकट और दरारें को बढ़ावा मिलेगा.लिटिल वे जानते हैं भावनाओं को विकसित करने और विशेष आवश्यकता समेकित जारी रखने के लिए शादी में, विशेष रूप से, यह पूरी तरह पहला प्यार, पहला प्यार से अलग है, कई वास्तविक, झूठे, प्रत्येक तत्व है, पुरुषों और महिलाओं के बीच शादी को कवर नहीं कर रहे हैं वास्तविक जीवन है, यह एक दूसरे के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं पूरी तरह से संपूर्ण सत्य बिखर, तब भी जब आप एक दूसरे की कमियों को नहीं देख सकता है प्यार में हैं,तो, शादी के पांच साल के भीतर, शादी एक ही बीज बोने की तरह है, ध्यान से संरक्षित किया जाना चाहिए, पूरी तरह खिलने में धीरे - धीरे उज्ज्वल फूल करने के लिए इतनी के रूप में.

4.मज़ा बिना जीवन, नवीनता बदौलत परिवार
एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए, जोड़ों के लिए उनकी पोशाक, शादी की सजावट जब नया घर बहुत खूबसूरत फैशन भी है पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं, लेकिन ठंडा शादी की गर्मी के साथ, कई जोड़ों को न केवल आसान जीवन के लिए जुनून शांत करने के लिए, और परिवार के वातावरण भी बहुत आसान है पर गिर लोकप्रिय, बहुत प्रभावशाली है कि सुश्री गायब हो गया था, और सुंदर लड़कों ठाठ चले गए हैं, या घर की सजावट, जब शादी भी समय कटाव और दृश्य थकान की वजह से बेरंग बिल्कुल रोमांटिक हो जाता है,समय बीतने के, जीवन और नए विचारों के रंग काफी शांत करने के लिए जमा उबाऊ और पुराने ढंग का, कठोर, और बेस्वाद हैं, भावनात्मक संकट में जिसके परिणामस्वरूप.

खुला अपराधी आसानी वैवाहिक संकट को जन्म, विवाह की रक्षा सही पर्चे होने के पहले दोनों एक दूसरे से बहुत, में से एक में गहराई को समझने के माध्यम से पुरुषों और महिलाओं के साथ सभी संपर्क के लिए किसी भी स्टाइलिश फ्लैश शादी मार्ग के लिए किसी भी समय लेने के लिए नहीं की कोशिश करो;. एक ही समय अपने ही साक्षरता का विकास और एक दूसरे को समायोजित करने के लिए शादी की जिम्मेदारी स्थापित करने के लिए कि शादी समझना अधिक समावेशी और जिम्मेदारियों है;शादी के बाद विशेष रूप से, दोनों पार्टियों के लिए भावनाओं का विकास जारी रखने के लिए, भावनाओं का कारण सही नहीं है, दोनों के प्यार और शादी के फूल पानी पत्नियों, लेकिन यह भी, हमेशा की तरह, पूर्व वैवाहिक प्यार के रूप में एक ही समय.

न केवल उपकरण के जीवन और अधिक ध्यान अपने कपड़ों पर होने के लिए, और घर की सजावट के अपरिवर्तनीय नहीं हैं, दृश्य थकान से बचने के लिए है, लेकिन रंगीन होना चाहिए, हर गुजरते दिन के साथ, इस शादी को एक अप्रत्याशित रोमांटिक और अतिरिक्त उपहार ले जाएगा, और यह है कि हाल ही में कई दोस्त बाड़ लाइन में भाग लेने के लिए ब्राउज़ Dulux सजावट डायरी गतिविधियों उनके अद्वितीय फैशन रंगीन घर सुधार से प्रेरणा इन डायरियों प्राप्त देखने के लिए मुश्किल नहीं हैउनके विवाहित जीवन भरा हुआ है, एक रोमांटिक है, है रंग की प्यार से भरा है, और वे मानते हैं कि सुख एक आश्चर्य से बना है, वे इस घटना में भाग लेने के आशा है एक, के लिए एक अप्रत्याशित रोमांटिक सबा जीत है जोड़े या तो के रूप में अन्य पुरस्कार, एक आश्चर्य की एक और खुश शादी जोड़ने के लिए,गृह सुधार उनकी डायरी, साथ ही उनके रोमांटिक शादी देखा वास्तव में सभी लोग ईर्ष्या करेंगे.

संक्षेप में, शादी के लिए समझ है, अधिक सहनशीलता, जिम्मेदारी, प्रशिक्षण और देखभाल की जरूरत की जरूरत है.

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सोमवार, 7 मार्च 2011

बेटी हूं मैं, कोई पाप नहीं


http://vangaydinesh.blogspot.com/बेटी हूं मैं, कोई पाप नहीं

भारत में लगातार बढ़ती जनसंख्या एक चिंता का विषय बनी हुई है विश्व में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है जहां एक ओर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन का दवाब विकास की गति को बाधित कर रहा है वहीं दूसरी ओर भू्रण हत्या के कारण घटता लिंगानुपात समाज के संतुलन को बिगाड़ रहा है। भारत में कन्या भ्रूण हत्या का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।सरकारी स्तर पर किए गए तमाम प्रयासों के बावजूद इसमें कमी नहीं आ रही है।
girl child 395x300 बेटी हूं मैं, कोई पाप नहींआजादी से पहले लड़किया मात पिता पर बोझ समझी जाती थी और पैदा होने के बाद ही उन्हे मार दिया जाता था लेकिन विज्ञान के बढते दायरे ने भ्रण हत्या को बढ़ावा दिया है भारत विश्व में के उन देशों में शामिल है जहां पर लिंगानुपात में भारी अंतर है लिंगानुपात से मतलब होता है प्रति हजार पुरूषों में महिलाओं की संख्या 1901 में भारत लिंगानुपात 972 जो कि गिरते गिरते 1991 में 927 हो गया1991 2001 में यह अनुपात 933 हुआ 2001 की जनगणना में लिंगानुपात की स्थिति ने इस बात पर बल दिया कि भारत में लिंग विरोधीसमाजिक व्यवस्था में परिवर्तन आ रहा है लेकिन इसी जनगणना में जब हम 0-6 वर्ष आयु के लिंग अनुपात में नज़र डालें तो सारी आशाएं चकनाचूर हो जाती है इस वर्ग में लिंगानुपात औऱ भी कम हो गया था जिससे इस बात का पता चलता है कि देश में लिंग भेद व्यवस्था कमजोर होने बजाये और फिर मुखर हो रही हैएक सर्वे के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष पांच लाख कन्या भू्रण हत्या होती है तथा पिछले दो दशक में एक करोड़ लड़कियां कम हो गई हैं।आलम यह कि लिंगानुपात का यह सामाजिक दुष्परिणाम पंजाब औऱ हरिय़ाणा जैसे राज्यों में सबसे अधिक है जहां युवकों का विवाह कठिन होता जा रहा है तो दूसरी तरफ पर्वी बिहारऔर पूर्वी उत्तर प्रदेश में लड़कियों के लिए भारी रकम खर्च कर उन्हे खरीदा तक जा रहा है खरीद कर लाई गई दुल्हनो को समाज औऱ परिवार दोनों जगहों पर ही सम्मान नहीं मिल पाता है यूनीसेफ के 2007के आंकड़ो पर यकीन करें तो लड़कियों की स्थिति को लेकर भारत का स्थान पाकिस्तान और नाइजीरिया से भी नीचे है।यूनीसेफ की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में रोजाना 7000 लड़कियों की गर्भ में ही हत्या कर दी जाती है।देश में लिंग जांच औऱ कन्या भ्रूण हत्या एक बड़ा व्यवसाय बनकर उभरा है।विश्व की बेहतरीन तकनीकों का निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए भारत अलट्रासाउंड़ मशीनों के व्यापार का एक बड़ा स्त्रोत बनकर उभरा है ।एक अनुमान है कि हर साल देश 300करोड से भी ज्यादा की मशीनें बाजार में बेज दी जाती हैं इन आधुनिक तकनीकों के चलते यह सुलभ हो गया है। आसानी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में पल बच्चा लडका है या लडकी मध्य प्रदेश में सबसे कम लिंगानुपात वालें जिले मुरैना मे तो हर गली में इस मशीने आपको देखने में मिल जायेगी कन्या भ्रूण हत्या के आंकड़ों को देखे तो यह प्रवृत्ति गरीब परिवारों के बजाए संपन्न घरों में अधिक है। महिलाएं चाहे जितनी भी शिक्षित हो जायें लेकिन परिवारिक दबाब और भावनाओं के चलते लडके औऱ लड़कियों में से उनकी पहली पसंद लड़के ही होते हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण समाज में बेटे की मां होना अपनेआप में गर्व का विषय होता है जहां बेटी पैदा होने पर दिन रात के ताने सुनने पड़ते है बहीं बेटे होने पर बहूओं को सर आंखों पर बिटाया जाता है।साथ ही साथ भारतीयों के भीतर बैठी एक विकृति भी कन्या भ्रूण हत्या के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है जिसका सीधा तालुक्क मोक्ष प्राप्ति माना जाता है भारतीय रीति अनुसार ऐसा माना जाता है कि बेटा ही कुल को स्वर्ग का रास्ता दिखाताहै।
दो बच्चों की अनिवार्यता और कन्या भ्रूण हत्या
परिवार का आकर सीमित करने और छोटे परिवार की धारणा को प्रबल करने के उद्देश से सरकार द्वारा दो बच्चों के सिद्धात को लागू किया सबसे पहले यह राजस्थान में 1992 में फिर हरिय़ाणा 1993 उसके बाद मध्य प्रदेश 2000 (जिसे वापस लिया गया था और अभी इसके बारे में मुझे पता नही है कि स्थिति क्या है),उड़ीसा 1993 आदि में लागू किया गया इस नियम के चलते दो अधिक संतानों वाले माता-पिता चुनाव में उम्मीदवारी और पंचायत राज संस्थाओं की स्वायत्त शासन की आधारभूत इकाईयों यथा पंचायती राज संस्थान और स्थानीय नगरीय निकायों में किसी भी पद के लिए अयोयग्य करार दिया है( राजस्थाम में लागू है) इन राज्यों में इस फैसले ने भी कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपरोधों को प्रोसाहित ही किया हैएक सर्वे के अनुसार इन सिंद्धात की बजह से समाज में महिलाओं की स्थिति पहले से ज्यादा बदतर हुई है।इसमे जबरिया गर्भपात कन्या शिशुओं का परिस्याग लोगों राजनैतिक आकंक्षाओं की बलि चढती जा रही है। राजनैतिक महत्वकाक्षांओं की पूर्ति के लिए बालिकाओं के प्रति उपेक्षाभाव,पतियों द्वारा पत्नियों का परित्याग कलह और बेटे को ही पैदा करने का दबाब महिलाओं पर पड रहा है
निर्णय लेने की अधिकारी नहीं है महिलाएं
घर में खाना बनाने के लिए जहां84 प्रतिशत महिलाएं स्वयं निर्णय ले सकती है बहीं सामाजिक और रीतिगत मामलों में उन्हें निर्णय लेनेका अधिकार सिर्फ 40 प्रतिशत ही है।समाज में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाएं अपने पतियों की हिंसा की शिकरा होती है तो 49 प्रतिशत महिलाएं ही पुरूषों के मुकाबलें कार्यशीलहैं।समाजिक दबाब के चलते उनके कानों यह बात बार बार डाली जाती है कि बगैर बेटे को पैदा किये समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान नहीं मिल सकता है।हमें मिलकर इस सामाजिक बुराई से लडना होगा समय के साथ साथ लडके औऱ लड़कियों के बीच के भेद को मिटाना होगा नहीं तो कहीं लड़किया सिर्फ वेश्यालयों मे ही ना पैदा होने लगे और हमारा संभ्रात समाज अपनी ही सोच के चलते सिमट कर ना रह जाये इन हालातो में एक बात जरूर हमें समझ लेनी चाहिए कि .यदि हम बेटियां नहीं चाहेगें तो हमे बहुए भी नसीब नहीं होगीं
“यहां आने से पहले बेटी पूछती है खुदा से
संसार तूने बनाया, या बनाया है इन्सां ने
मारे वो हमको जैसे, हम उनकी संतान नहीं
डर लग रहा है कभी वापस भेज न दे वो हमें यहां से
कहा फिर उस खुदा ने कि भूल गया है इन्सां
जहां बेटी नहीं है बता वो कौन सा है जहां
वक्त एक ऐसा आएगा, ‘औरत’ शब्द रह न जाएगा
फिर पूछूंगा इन्सां से, अब तू ‘बेटा’ लाएगा कहां से”
दिनेश पारीक




रविवार, 6 मार्च 2011

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ एक पहल


कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ एक पहल: आज इस कलयुग में कुछ लोग बेटी के जन्म को मुसीबत मानने लगे हैं और कन्या भू्रण हत्या का प्रचलन तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। बेटी के पैदा होने पर घरों में मातम छा जाता है। सांझे चूल्हे और संयुक्त परिवार लगभग खत्म होते जा रहे हैं। हर एक रिश्ता सिर्फ और सिर्फ मतलब का रिश्ता बनता चला जा रहा है।
girl child enfanticide 300x232 कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ एक पहलवहीं आज कन्या भू्रण हत्या रोकने के लिये राम के इस देश भारत में एक जिला ऐसा भी है जिस में बसने वाले लोग खासकर युवा वर्ग आज जिस युग में जी रहे हैं, उसे रामराज कहना ही उचित होना। सोनभद्र जिले के राबर्टसगंज ब्लाक के छोटे-छोटे तीन गांव मझुवी, भवानीपुर और गइर्डगढ के 60 युवाओं ने एक मण्डली तैयार की है। मण्डली अपने गांव में होने वाली किसी धर्म और जाति की कन्या की शादी में टेंट, तम्बू से लेकर बर्तन भान्डे का काम खुद सभालती है।
इस समूह ने बड़े बड़े दानियों से दान लेकर नहीं बल्कि खुद अपने संसाधनों से शादी विवाह में काम आने वाले तमाम छोटे बडे़े साजो सामान जुटा लिये हैं। संगठन से जुड़े युवा लड़की के घर वालों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ मिनटों में हर सामान की व्यवस्था कर देते हैं।
इस युवा समूह के सदस्य शादी ब्याह के वक्त लड़के वालों की आव भगत और खाने पीने की व्यवस्था भी खुद ही देखते है। सन् 2002 में बने इन संगठन के द्वारा लाभान्वित कई ग्रमीणों का कहना है कि उन्हें बेटी की शादी में कोई भी परेशानी या भाग दौड़ नहीं करनी पड़ती।
यंू तो बेटी का विवाह एक सामाजिक परम्परा है लेकिन अगर ऐसी ही एक सोसायटी हम सब लोग भी मिलकर बना लें और आपस में एक दूसरे का हाथ बटाने लगें तो बेटियों की शादी हम लोग और अच्छे ढंग से कर सकते है। इन युवाओं की पहल और इन के इस जज्बे को पूरे देश को सलाम करना चाहिये और अपनाना चाहिये। आज इस दौर की जरूरत है इस अच्छी और आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने वाली इस परम्परा की।
क्यों आज हम अपनी सभ्यता अपने आदर्शों और अपनी अपनी उन मजहबी किताबों के उन रास्तांे से भटकने लगे है जो हमें इंसान बनाती हैं और अच्छे और सच्चे रास्तों पर चलना सिखाती है। इंसान से मोहब्बत करना सिखाती है। शायद पैसे का लालच, समाज में मान सम्मान पाने का जुनून, अपने बच्चों के लिये राजसी सुख सुविधाओं का ख्वाब या फिर आज हमारे समाज में विकराल रूप धारण कर चुके दहेज के दानव के कारण हम कन्याओं को जन्म दिलाने से डरने लगे हैं जो कन्या भू्रण हत्या का मुख्य कारण हैं।
आज हम इंसान बनना क्यों भूलते जा रहे है, यह हम सब को सोचने जरूरत है क्योंकि इत्तेफाक से हम सब इंसान हैं। बेटियों से घर आंगन में रौनक है। ममता, प्रेम, त्याग, रक्षा बन्धन और न जाने कितनी परम्परायें जीवित हैं। कन्या भ्रूण हत्या पाप ही नहीं, देश और समाज के लिये अभिशाप है।

स्वच्छ सन्देश: भारत में मुस्लिम समाज ‘कन्या भ्रूण-हत्या’ की लानत से सर्वथा सुरक्षित है.

स्वच्छ सन्देश: भारत में मुस्लिम समाज ‘कन्या भ्रूण-हत्या’ की लानत से सर्वथा सुरक्षित है.

शनिवार, 5 मार्च 2011

स्त्री का अस्तित्व और सवाल


एक सवाल अपने अस्तित्व पर,
मेरे होने से या न होने के दव्न्द पर,
कितनी बार मन होता है,
उस सतह को छु कर आने का,
जहाँ जन्म हुआ, परिभाषित हुई,मै,

अपने ही बनाये दायरों में कैद!
खुद ही हूँ मै सीता और बना ली है,astitva 223x300 स्त्री का अस्तित्व और सवाल
लक्ष्मण रेखा, क्यूंकि जाना नहीं
है मुझे बनवास, क्यूंकि मै
नहीं देना चाहती अग्निपरीक्षा…..
इन अंतर्द्वंद में, विचलित मै,
चीत्कार नहीं कर सकती, मेरी आवाज़
मेरी प्रतिनिधि नहीं है,
मै नहीं बता सकती ह्रदय की पीड़ा ,
क्यूंकि मै स्त्री हूँ,
कई वेदना, कई विरह ,कई सवाल,अनसुलझे?
अनकहे जवाब, सबकी प्रिय, क्या मेरा अपना अस्तित्व,
देखा है मैंने, कई मोड़ कई चौराहे,
कितने दिन कितनी रातें, और एक सवाल,
सपने देखती आँखें, रहना चाहती हूँ,
उसी दुनिया में , क्यूंकि आँख खुली और
काला अँधेरा , और फिर मैं, निःशब्द,
ध्वस्त हो जाता है पूरा चरित्र, मेरा…….
कैसे कह दूँ मैं संपूर्ण हूँ,
मुझमे बहुत कमियां है, कई पैबंद है……….
मै संपूर्ण नहीं होना चाहती,
डरती हूँ , सम्पूर्णता के बाद के शुन्य से
मै चल दूंगी उस सतह की ओर………
ढूंढ़ लाऊँगी अपने अस्तित्व का सबूत…
अपने लिए, मुझे चलना ही होगा,
मैं पार नहीं कर पाउंगी लक्ष्मण रेखा,
मैं नहीं दे पाऊँगी अग्निपरीक्षा,
मैं सीता नहीं,
मैं स्त्री हूँ,
एक स्त्री मात्र!

चौखट पर चीख, चौराहे पर चीरहरण


सदियों से महिलाओं के साथ जैसा दमन और अत्याचार हुआ है वह अकल्पनीय है.सीता और पारवती की आर में पुरषों की साज़िश अब खुलकर सामने आने लगी है.एस देश में स्त्रियों की दशा बद से बदतर होती जा रही है. यह हमारे व्यवहार में आ गया है की हमने स्त्री दमन को सामाजिक स्वरुप दे दिया है. पुरूषों की भोगवादी मानसिकता स्त्रियों को मुक्त देखना पसंद नहीं कर पाती. लेकिन यह भी सही हैकि इसी भोगवादी मानसिकता ने स्त्रियों के लिए रास्ता तैयार किया है और स्त्रियाँ चौखट से निकलकर चौराहें पर आ गयीं है.
breaking free चौखट पर चीख, चौराहे पर चीरहरण पुरुष ने शायद ही कभी इस बात पर ध्यान दिया हो की महिला वैश्याओंकी मंडी क्यूँ अस्तित्व में बनी रही है.लेकिन “मेल स्ट्रिप” का बाज़ार लगता है तो हमारे भौतिक आचरण में सडन आने लगती है.क्यूँ भाई? ऐसा क्यूँ ? क्या स्त्री वैश्या की खोज नहीं कर सकती? देखने सुनने में यह बात भले ही थोड़ी असहज लगे लेकिन यह चेतना के उस धरातल की आजादी है जहाँ सच में बराबरी का बोध होता है.जहाँ स्त्री अपने से अपने बारे में निर्णय लेने के लिया स्वतंत्र है.
यह भी सच है की तथाकथिक आज़ादी का सबसे ज्यादा फ़ायदा बाज़ार उठा रहा है , पुरुष समाज में सदियों से दमित स्त्री देह की लालसा फुटकर बहार निकल रही है. ऐसे में बाज़ार को लगता है की स्त्री देह को जितना बेच सको बेच लो. हमारे आस पास ऐसी घटनाएँ घाट रही है जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते. स्त्री खुले आम अपने देह का पर्दर्शन कर रही है. सुन्दरता का बाजारीकरण हो चूका है.लड़कियां इस पूरी व्यवस्था में यह भूल जाती है की उनका शारीर बाज़ार में रखी कोई वस्तु नहीं है जिसका उद्देश्य किसी और के आनंद और भोगने का माध्यम है.अचानक एक गाना याद आ गया” एक ऊंचा लम्बा कद दूजा सोनी भी तू हद” आगे और भी है. गाने में हीरो कारन बता रहा है की मई क्यूँ तुम पर मरता हूँ. तुम पर मरना की वजह तुम्हारा दिल; दिमाग ,चरित्र नहीं केवल तुम्हारा रूप है. एक ऑब्जेक्ट में तब्दील होती लड़कियां और उपभोक्ता होते पुरुषों की मानसिकता को बनाने में हम सभी का योगदान है.
हम स्त्रियाँ ये नहीं जानती की हम एक व्यवस्था के पंजे में जकड़ी है जो हमे गुलाम करने के नित्य नए तरीके इजाद कर रहा है.जब वे चूल्हे चौखट तक सिमित थी तब भी और अब भी जब वे देहरी के बहार कामयाब होने निकली हैं ,तब भी वे धीमी गति से गुलाम होती जा रही है.जैसा की मधुर भंडारकर की फिल्म फैशन में दिखाया गया है की मॉडल होना एक प्रोफेशन है जिसमे आप केवल एक वस्तु है. एक शारीर जिसे सोचने नहीं दिया जाता जो धीरे धीरे सोचना बंद कर देता है. स्त्री देल aaj  उत्पाद में तब्दील होती जा रही है. इस ब्रेन वश से अज अगर नहीं बचा गया तो स्त्री मुक्ति सदियों दूर हो जाएगी.बार्बी और जीरो फिगर को आदर्श मानने वाली स्त्रियाँ अगर चिन्तनशील है, विचारवान है, अपनी अस्मिता के प्रति सचेत हैं , स्वयं को इन्सान से वस्तु में तब्दील होने देना नहीं चाहती तब शायद चिंता का विषय नहीं है ……………पर क्या वाकई ऐसा है? शायद नहीं.

एक सदी का युद्ध : स्त्री

कई दिनों से सामान बांधे , रेल का टिकेट मेरे पास है…. जाना चाहती थी मै, ऐसी ही यात्रा पर क्यूँ नहीं निकल जाती आज पैर चौखट से निकलते ही नहीं कई बार समझाया, अपनी खुद की व्यथा पर रोई , खुद पर चीत्कार की, जाना ही नियति है, लेकिन पैर ही नहीं उठते मेरे रात का खाना टेबल पर है कपडे सारे धुले हुए अलमारी में…. जाने की सारी तैयारी, पिछली रात को कर ली थी मैंने, फिर क्यूँ खड़ी हूँ मैं , भावशून्य आशंकित, किसका इंतज़ार है, मैंने कितने फैसले सुने, और आज एक फैसला नहीं कर सकती नहीं कर पा रही हूँ, चौखट पार ….. नहीं तोड़ पा रही हूँ मोह की जंजीर, हाथ थामे, कई अनदेखे सपने सूटकेस में बंद, अन्दर आये थे इस चौखट के, बहार तो सिर्फ मुझे जाना है, सारे बीते सालों का मंज़र, मुठी में बंद किये, खड़ी हूँ , आज खुद से नाराज़, हालात से खफा इतनी देर से क्या सोच रही हूँ मै, शायद, पांच बज गए है चाय बना लेती हूँ……………… चौखट पार कर जाती तो….. जीत जाती एक सदी का युद्ध !!!!